नारी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 346)

देख नारी की हालत ,छलनी हो जाता है सीना , पैसा ,पद के दम पर,नारी की आबरू को छीना पैसो के जो लालची , सौदेबाज़ी करते ना थकते जैसे लडकी तो गुडिया है , खाने की पुडिया है बनते फिरते दु:शासन ,आज चीर सब हरते मॉ का मान भूल गये , अय्याशी मे डूब गये…