नव वर्ष पर # जिंदगी की किताब (पन्ना # 388)

ैकुछ खट्टी कुछ मीठी यादों के साथ , जिन्दगी की किताब का एक और पन्ना कम हो रहा है , सुलभ डोर से फिर एक मोती झड़ रहा है , एक और दिसम्बर गुजर रहा है !कुछ चेहरे घटे,कुछ चेहरे बढ़े ,गुजरे व जुड़ी ,कुछ हटी , उम्र का पंछी नित दूर और दूर उड़…