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ज्ञान तीन प्रकार से मिलता है किताबों से – यह सबसे सरल है अनुभव से – यह सबसे कडवा है अंतर्मन से – यह सबसे श्रेष्ठ है आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता जय सच्चिदानंद 🙏🙏 Advertisements

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हमारा व्यवहार कई बार हमारे ज्ञान से अधिक अच्छा साबित होता है क्योंकि जीवन में जब विषम परिस्थितियां आती हैं तब ज्ञान हार सकता है परन्तु व्यवहार से हमेशा जीत होने की संभावना रहती है । आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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एक गलत आदत आदमी को अंधा कर देती है एक बुराई व्यक्ति के तेज को मंदा कर देती है कितना बडा सत्य है इस बात मे दोस्तो एक मछली सारे तालाब को मंदा कर देती है आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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अच्छे संदेश सबको दो,लेकिन ज्ञान की बात उन्हे सुनाओ जो सुनने का आनंद लेते है क्योकि अमूल्य हीरा पहचानना हर किसी के बस मे नही होता है आपकी आभारी विमला विल्सन जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Quote # 396

श्रद्धा ज्ञान देती है ,नम्रता मान देती है और योग्यता स्थान देती है कितनी सच्चाई है यारों अगर तीनों मिल जाये तो व्यक्ति को हर जगह सम्मान देती है आपकी आभारी विमला विल्सन जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Quote # 275

दर्पण कभी झूठ नही बोलता प्रेम कभी ईर्ष्या नही करने देता आध्यात्मिक ज्ञान आकुल नही होने देता सत्य कभी कमजोर नही होने देता विश्वास दुखी नही होने देता कर्म कभी असफल नही होने देता आपकी आभारी विमला विल्सन जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Quote # 118,119,120

आईना आईना का क्या काम है ? आईना हमे क्या दिखाता है ? ऑंखो से हम सब चीज देख सकते है पर बिना आईना के हम अपनी ऑंखें भी नही देख सकते । ज्ञान भी एक आईना है , ऐसा आईना जो हमे अपने भीतर तक ले जाता है , बाहर की और नही ।…

ध्यान के फायदे # जिंदगी की किताब (पन्ना # 316)

मन की शांति सबसे बड़ी दौलत है । ध्यान से हमारी आध्यात्मिक उन्नति तो होती ही है ,साथ मे यह हर दिशा मे प्रगति करने मे सहायता करता है व साथ मे शांति व सुकून भी देता है ।ख़ुद का मन शांत होने से घर मे ,समाज मे भी शांति व आनन्दमय का वातावरण स्थापित…

लफ्ज # 58,59 60

1. मन्दिर मस्जिद तीर्थ जाये या गुरूद्वारा चर्च पत्थर से करता प्यार मगर इंसान रहा ठुकराय !! 2. तीर्थ मंदिर ,ग्रंथों मे ढूँढे पत्थर पर शीश झुकाय ख़ुद मे खुदा बसा पहचान न ख़ुद को पाय !! 3. कोटि धर्म व तीर्थ करो चाहे कर लो जतन हजार आत्म स्वरूप जाने बिना, सब धर्म कर्म…

Quote # 68

Hey parmatma anadikal se humne sampatiwan, shaktiman, kirtiman, dhawan banney ki prarthna ki hai, parantu gungaan, sheelwan, dayawan, shamawan, bhaktiman, banney ki prarthna nahi ki, hey prabhu! Aap humari is parampara ko badal dene ki samarthaya dena. हे परमात्मा अनादिकाल से हमने संपतिवान , शक्तिमान, कीर्तिमान , धनवान , बनने की प्रार्थना की परंतु गुणगान…

Quote # 67

संतों की संगत उस इत्र की तरह होती है जिसे भले ही बदन पर ना लगाये , तब भी उसकी महक से दिल अवश्य आनंदित होता है । आपकी आभारी विमला विल्सन जय सच्चिदानंद

वास्तविक स्वभाव मे रमण करे # जिंदगी की किताब (पन्ना # 397)

वास्तविक स्वभाव मे रमण करे तो जिन्दगी जीना सहज होगा वह भी एक सकुन के साथ । हर इंसान मे कुछ ना कुछ विशेष गुण (अच्छा गुण ) जरूर होता है , यदि वह इस विशेष गुण को किसी भी स्थिति मे बरकरार रखे तो वह अपना ध्येय आसानी से पूरा करने मे समर्थ हो…