आंतरिक या बाह्य योद्धा ? # जिंदगी की किताब (पन्ना # 310)

हम सभी एक तरह से अपनी संपूर्ण जिन्दगी के बाह्य व आन्तरिक युद्ध के योद्धा है । हमारे चक्षु बाहर की दुनिया को देखने मे इतने अभ्यस्त है कि उन्हें कभी अपने अंदर झॉकने का ध्यान ही नही जाता । लेकिन जिस दिन हम आंतरिक चक्षु के अभ्यस्त हो जायेंगे ,उस दिन हम अपने भीतर…

आध्यात्मिक बात # आत्मा # Quote

एक आत्मा में कितना ज्ञान है? इस जगत् के जितने जीव हैं, उन सभी का ज्ञान इकट्ठा किया जाए, उतना ज्ञान एक आत्मा में है! How much knowledge is there in one Soul (Atma)? However many living beings there are in this world, if the knowledge of all those living beings was to be put…

इंसान # सुविचार # लफ्ज

1. मन्दिर मस्जिद तीर्थ जाये या गुरूद्वारा चर्च पत्थर से करता प्यार मगर इंसान रहा ठुकराय !! 2. तीर्थ मंदिर ,ग्रंथों मे ढूँढे पत्थर पर शीश झुकाय ख़ुद मे खुदा बसा पहचान न ख़ुद को पाय !! 3. कोटि धर्म व तीर्थ करो चाहे कर लो जतन हजार आत्म स्वरूप जाने बिना, सब धर्म कर्म…

प्रार्थना का महत्व # जिंदगी की किताब (पन्ना # 402)

प्रार्थना का महत्व …… ईश्वर की प्रार्थना मे अपूर्व शक्ति है यदि इस पर विश्वास व श्रद्धा रखी जाये तो अपूर्व वस्तु की प्राप्ति होती है ।जैसे कि कल्पवृक्ष मे कोई वस्तु नज़र नही आती लेकिन उसके नीचे बैठकर जिस वस्तु की कल्पना की जाती है वह मिल जाती है ।ठीक उसी प्रकार परमात्मा की…

पराई पीड़ा का पहचान # जिंदगी की किताब (पन्ना # 400)

पराई पीड़ा का पहचान ……..क्या हम सभी मानव अपनी आत्मा के समान दूसरे की आत्मा को मानते है ? तो सभी का जवाब होगा कि हॉ , हम सभी इंसान की आत्मा को एक समान मानते है । लेकिन यदि हमें इसका मापदंड करना है तो कर सकते है । जैसे कि अभी सर्दी का…

आत्मशक्ति # जिंदगी की किताब (पन्ना # 392)

आत्म शक्ति …. यह शरीर आत्मा के सहारे ही टिका है ।शरीर मे जो कुछ भी होता है वह वह सब कुछ आत्मा की शक्ति के बदौलत होता है । ये सब कुछ चर्म चक्षुओ से नही बल्कि अपने भीतर गहराई से उतरने पर महसूस होगा । आत्मा तो अनंत शक्ति वाला है पर इस…

आत्मा का अस्तित्व # जिंदगी की किताब (पन्ना # 371)

आत्मा का अस्तित्व …. जो व्यक्ति प्रत्यक्षवादी मे विश्वास रखते है व आत्मा का अस्तित्व होने के लिये प्रत्यक्ष दिखाने के लिये तर्क करते है ।उनके लिये एक संत ने एक व्यक्ति को बहुत ही सुंदरता के साथ जवाब दिया जो इस प्रकार है – संत ने उस व्यक्ति से पूछा कि तुमने अंग्रेज़ी पढ़ी…

सुंदर रूप का स्वरूप # जिंदगी की किताब (पन्ना # 348)

भौतिकतावादी संसार मे हम सभी बाह्य रूप से दिखने वाली सुंदरता को ही असली सुंदरता मान बैठते है । पर यह सुंदरता आध्यात्मिक दृष्टि की सुंदरता के सामने फीकी पड़ जाती है उसी सन्दर्भ मे बोला गया है कि किसी भी इंसान की सुंदरता का स्वरूप उसकी बाहरी चमक दमक देखकर ना समझो । बल्कि…

लफ्ज # धार्मिकता # जागरूकता

1.भगवान को खोजने वाले को भगवान दर्शन नहीं देते परंतु भगवान में खो जाने वाले को भगवान दर्शन जरूर देते हैं । 2. व्यापार मे धर्म करो धर्म मे व्यापार नही । 3. धर्म करने के लिये शहर, गॉव या जंगल ,कही पर भी जाने की जरूरत नही है क्योकि वस्तुत: धर्म न गॉव मे…