विचारणीय योग्य बाते # आध्यात्मिक बात # जिन्दगी # Quotes #

विचारणीय योग्य बात धर्म या परमात्मा के लिये आपने जिन्दगी मे कौनसा समय तय कर रखा है ? शरीर मे शक्ति है तब या शरीर बूढ़ा या अशक्त हो जाये तब लेकिन अधिकांश लोगो ने धर्म का समय बुढापे के लिये रखा है व ताकत का समय संसार के लिये रखा है । क्यो नही…

प्रेरणादायी # आध्यात्मिक बात # सुविचार # Quotes

हम बाहरी दुनिया से कभी भी शान्ति नही पा सकते है जब तक हम अंदर से शांत ना हो । मन अक्सर कहता है ईश्वर से कुछ मांग ले पर आत्मा रोक देती है यह कहकर कि, प्रभु ने जितना भी दिया है क्या कम था ? क्या मैं उसके काबिल था ? बहुत फर्क…

आध्यात्मिक बात # आत्मा # Quote #

आत्मा भी अंदर है परमात्मा भी अंदर है और परमात्मा से मिलने का साधन भी अंदर है आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता जय सच्चिदानंद 🙏🙏

बहुत ही कड़वी सच वाणी # आध्यात्मिक बात # Quote #

बहुत ही कड़वी सच वाणी बुराई करना दोष बताना अच्छी बात हैं पंचायती करना अच्छी बात हैं निंदा करना भी अच्छी बात हैं लेकिन किसकी ? ? ? अपनी ..खुद की …अपने आप की किसी दूसरे की बिलकुल भी नहीं फिर पता चलेगा कि हम किसी से कम नहीं और इस दुनिया में हम से…

आध्यात्मिक विचार # अच्छे विचार #

एक बार कागज का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा।पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा-भाई ! यहाँ कैसे पधारे ? कागज ने कहा अपने दम पर.. जैसे ही कागज ने अकड़ कर कहा अपने दम पर …और तभी हवा का एक दूसरा झोंका आया और…

कालचक्र भाग (आरा) – छ: # जिंदगी की किताब (पन्ना # 420)

6. छट्ठा आरा दुषमा – दुषमा काल – शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते है । पॉच आरों के बारे मे आपको जानकारी मिल चुकी है । अभी पॉचवां आरा चल रहा है । इक्कीस हज़ार वर्ष अवधि वाले पॉचवे आरे की समाप्ति के साथ ही दुख वाला छट्ठा आरा प्रारम्भ होता है । इसकी…

कालचक्र भाग (आरा) – पॉच # जिंदगी की किताब (पन्ना # 419)

5. पंचम आरा ….जो अभी चल रहा है  दुषमा काल  शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते है । चार आरों के बारे मे आपको जानकारी मिल चुकी है । चौथे आरे की समाप्ति पर 21,000 वर्ष की अवधि वाला पॉचवां दुख वाला आरा आरम्भ होता है । अभी कलयुग मे पॉचवां आरा चल रहा है…

कालचक्र भाग (आरा) – चार # जिंदगी की किताब (पन्ना # 418)

4. चौथा आरा –  दुषमा – सुषमा काल  शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते है । तीन आरों के बारे मे आपको जानकारी मिल चुकी है। तीसरे आरे की ठीक समाप्ति के साथ ही चौथे आरे का आरम्भ होता है । इसमे दुख अधिक और सुख कम होता है । इसके प्रारम्भ मे मनुष्यों की अधिकतम…

कालचक्र भाग (आरा) – तीन # जिंदगी की किताब (पन्ना # 417)

आपको पिछले लेख मे पहले आरे की जानकारी से अवगत करवाया । अब दूसरे व तीसरे आरे के बारे मे आपको बताते है  2.  दूसरा आरा –  सुषमा काल ….. शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते है । पहले आरा के बारे मे आपको जानकारी मिल चुकी है । इस आरे की स्थिती भी प्राय…

कालचक्र भाग (आरा ) – दो # जिंदगी की किताब (पन्ना # 416)

पिछले लेख मे आपको कालचक्र की थोड़ी जानकारी दी ।आगे की जानकारी … सुख और दुख दो अवस्थाये है । यह अवस्थाये निरंतर रूप से चलती है । इसे हम काल चक्र की संज्ञा भी दे सकते है । काल को दो भागो मे बॉटा गया है …. 1. व्यवहार काल 2. निश्चय काल व्यवहार…

कालचक्र भाग ( आरा) – एक # जिदगी की किताब (पन्ना # 415)

शास्त्र के अनुसार कालचक्र का विवरण …. शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते  है । अभी कलयुग मे पाँचवा आरा चल रहा है । 21000 हजार वर्ष का एक आरा होता है । अभी पाँचवा आरे मे 2026(विक्रम संवत)वर्ष पूरें हो चुके है । अब 18974 वर्ष बचें है । इस पंचम आरें को कलयुग…