बहू # जागृति # प्रेरणादायी कहानी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 229)

बहू ….

ये कहानी पढ़कर दिल को छू गई और आपसे शेयर करने का मन हो रहा है ….

एक घर में नई बहु आई। पहले ही दिन से ससुराल में सास ससुर आदि ने बहु के कामकाज में मीनमेख निकालना प्रारंभ कर दिया। मायके में यह नहीं सिखाया और यह नहीं सिखाया। साथ ही शादी के लेनदेन पर भी नुक्ताचीनी। हाँलांकि बहु एक बहुत ही समृद्ध, सुशिक्षित, सुसंस्कारित और प्रतिष्ठित परिवार से आई थी। सास ससुर सदैव स्वयं में गृह स्वामी होने का दंभ भी रखते थे। बहु ने सभी बातों कोसंस्कारवश और समाज, परिवार, मायके वालों की प्रतिष्ठा आदि को ध्यान में रखकर नम्रतापूर्वक सहन किया पर अंदर से मन में गाँठ बनती गई।

लगभग 20-25 साल का समय बीत गया। सास ससुर वृद्धावस्था का प्राप्त कर असहाय, अक्षम और बीमार रहने लगे। बहु अधेड़ हो गई और वह अब घर की मालकिन है। अब सास ससुर हर बात में बहु पर आश्रित हो गए। कोई भी काम हो, घर में अब बहु की इच्छा और सहमति के बिना पूरा नहीं होता। बहु आज भी सास ससुर के सभी काम जिम्मेदारी से करती है पर मन में 20-25 सालों से पनपी गाँठ पीड़ा देती है और सास ससुर के प्रति वह समर्पण भाव नहीं रहता है जो होना चाहिये। यह बात सास ससुर भी महसूस करते हैं पर अब वे अशक्त और परवश हैं।

यह कथा अनेक घरों की है। किसी भी घर में जब बहु आती है तो उसका स्वागत भविष्य में होनेवाली घर की मालकिन की माफिक नहीं किया जाता है और उसे ससुराल के नियम कायदे सिखाने का प्रयास किया जाता है। हर घर में काम करने की प्रथा अलग होती है। बहु को निश्चित समझने में समय लगता है। उसे समय देना चाहिए।ससुराल वाले यह भी भूल जाते हैं कि वे एक सुसंस्कारित और प्रतिष्ठित परिवार की बेटी ब्याह कर लाये हैं। और क्या यह उचित नहीं होगा कि प्रतिष्ठित और सुसंस्कारित बहु के कुछ आचार विचार ससुराल वाले भी अपना लें?

नारी के पांच रूप होते हैं जिनमें से एक उसके पिता के गृह से संबंधित रहता है और चार उसके पति के गृह से सम्बन्धित रहते हैं

पहला रूप कन्या का है जब वह पिता के घर में रहती है दूसरा रूप वधु का है जब उसकी शादीहोती है

तीसरा रूप भार्या का है

चौथा रूप है जननी का है

और पॉचवॉ रूप माता का

कन्या, वधु, भार्या, जननी और माता, ये स्त्री के पांच रूप हैं जिसमे एक रूप पिता के घर में और चार रूप पति के घर में रहते हैं

अगर कोई स्त्री अपने पति के घर में आई है तो यहाँ उसको चार रूपों का पालन करना है अतः हमें समाज में ऐसा वातावरण बनाना चाहिए कि नारी सभी रूपों में सफल हो के।

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आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानन्द 🙏🙏