भलाई # प्रेरणादायी कहानी # जागृति # जिंदगी की किताब (पन्ना # 424)

एक राजा था ,जिसने कई खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे । उन कुतो का इस्तेमाल वह लोगों को उनके द्वारा की गयी गलतियों पर मौत की सजा देने के लिए करता था ।एक बार राजा के एक पुराने मंत्री से कोई गलती हो गयी ।गुस्से मे राजा ने मंत्री को शिकारी कुत्तों के सम्मुख फिकवाने का आदेश दे डाला।सजा दिए जाने से पूर्व राजा ने मंत्री से उसकी आखिरी ख़्वाहिश पूछी।

मंत्री बोला ,राजन मैं सजा पाने से पहले आपसे 10 दिनों की मोहलत चाहता हूँ ।

राजा ने उसकी बात मान ली ।दस दिन बाद राजा के सैनिक मंत्री को पकड़ कर लाते हैं और राजा का इशारा पाते ही उसे खूंखार कुत्तों के सामने फेंक देते हैं। परंतु कुत्ते मंत्री पर टूट पड़ने की बजाय अपनी पूँछ हिला हिला कर उसके ऊपर कूदने लगते हैं और प्यार से पैर चाटने लगते हैं। राजा आश्चर्य से यह सब देख रहा था ।उसने मन ही मन सोचा कि आखिर इन खूंखार कुत्तों को क्या हो गया है ? वे इस तरह क्यों कर रहे हैं ?

आखिरकार राजा से रहा नहीं गया उसने मंत्री से पुछा कि ये सब क्या हो रहा है ? ये कुत्ते तुम्हे काटने की बजाये तुम्हारे साथ खेल क्यों रहे हैं ?

मंत्री बोला कि हे राजन ! मैंने आप से जो 10 दिनों की मोहलत मॉगी थी , उसका एक-एक क्षण मैने इनकी सेवा करने में लगा दिया। मैं रोज इन कुत्तों को नहलाता , खाना खिलाता व हर तरह से ध्यान रखता।

ये कुत्ते खूंखार और जंगली होकर भी मेरे दस दिन की सेवा नहीं भुला पा रहे हैं परंतु अफसोस है कि आप हमारे प्रजापालक, राजा हो कर भी इतने वर्षों की मेरी स्वामीभक्ति को भूल गए और एक छोटी सी गलती पर मुझे इतनी बड़ी सजा सुना दी

राजा को अपनी भूल का एहसास हुआ । उसने तुरंत मंत्री को आज़ाद करने का हुक्म दिया और आगे से ऐसी गलती ना करने की क़सम खाई ।

दोस्तो !! आज के युग मे इस बात मे बहुत हद तक सच्चाई है कि चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो ,उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही सीमित है

कई बार राजा की तरह हम भी किसी की ढेर सारी अच्छाईयो को उसकी एक गलती के कारण भुला देते हैं । कभी कभी इस वजह से कुछ अनर्थ भी होने की संभावना हो जाती है ।

यह कहानी सिखाती है कि हमे किसी की ढेर सारी अच्छाइयों को उसकी कुछ बुराई के सामने नजरअंदाज ना करे।


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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