जिन्दगी # जागृति # Quote #

एक फ़क़ीर से मुलाक़ात हुई, तो मैंने गुज़ारिश की जिंदगी की कोई नसीहत दीजिये मुझे

उन्होंने सवाल किया, कभी बर्तन धोये हैं ?

मैने हैरान होकर कहा, जी धोये हैं

पुछा …क्या सीखा ?

मैंने कोई जवाब नही दिया

वो मुस्कुराये और कहा

बर्तन को बाहर से कम और अंदर से ज्यादा धोना पड़ता है

बस यही जिंदगी है


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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