मदद # प्रेरणादायी कहानी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 413)

दिल को छू जाने वाली story ….

मदद – कुछ इस तरीके से करके तो देखिये …

दिल को छू जाने वाली story …….

ऑफिस से निकल कर गुप्ता जी ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया कि पत्नी ने कहा कि एक किलो बेर लेते आना।

तभी उन्हें सड़क किनारे ताज़ा बेर बेचती हुई एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़ी औरत दिखाई दी ।वैसे तो गुप्ता जी सब्जी ,फल वग़ैरह हमेशा बडी दुकान से ही लेते थे, पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ ?

उन्होंने बुढ़िया से पूछा, मॉ जी बेर कैसे दिए

बूढी औरत बोली, बाबूजी 30 रूपये किलो का भाव है । गुप्ता जी बोले, मॉ जी 20 रूपये दूंगा। बूढी औरत ने कहा, 25 रूपये दे देना, दो पैसे मै भी कमा लूंगी।

गुप्ता जी बोले, 20 रूपये मे देना हो तो बोलो ।बुझे चेहरे से बुढ़िया ने मना कर दिया ।गुप्ता जी बिना कुछ कहे चल पड़े और बडी दुकान मे जाकर बेर का भाव पूछा ,तो पता चला कि 35 रूपये किलो का भाव है । उन्होंने दुकान वाले को बोला कि इतने साल से तुम्हारे यहॉ से फल खरीद रहा हूँ , दाम तो सही करो । उसने एक बोर्ड की और इशारा किया जिस पर लिखा था “ fix rate “

गुप्ताजी को उसका यह व्यवहार बहुत बुरा लगा,

उन्होंने कुछ सोचकर स्कूटर को वापस उस ओर मोड़ दिया जहॉ बूढी औरत फल बेच रही थी ।

बुढ़ी औरत ने उन्हें पहचान लिया और बोली, बाबूजी बेर दे दूँ, पर भाव 25 रूपये से कम नही लगाउंगी। गुप्ता जी ने मुस्कराकर कहा, मॉ जी दो किलो दे दो और भाव की चिंता मत करो।

बुढ़ी औरत का चेहरा ख़ुशी से दमकने लगा । बेर देते हुए बोली। बाबूजी मेरे पास थैली नही है फिर बोली, एक समय था जब मेरी भी छोटी सी दुकान थी , मगर पति की लंबी बीमारी के ख़र्चे मे सारी दुकान चली गई व अंत मे पति भी नही रहा ।बेटा अपने परिवार के साथ कही और रहता है , उसकी कोई भी मदद नही है ,वह होते हुये भी नही के बराबर है । अब खाने के भी लाले पड़े हैं। किसी तरह पेट पाल रही हूँ।

इतना कहते कहते वह रुआंसी हो गयी, और उसकी आंखों मे आंसू आ गए । गुप्ताजी ने 100 रूपये का नोट बुढ़िया को दिया तो वो बोली “बाबूजी मेरे पास छुट्टे नही हैं। गुप्ताजी बोले मॉजी चिंता मत करो, रख लो, अब मै तुमसे ही फल खरीदूंगा । दूसरे दिन गुप्ताजी ने बूढी औरत को 1000 रूपये दिये और कहा कि इसे और सब्जी व फल खरीद कर बेच देना ।पैसे की चिंता मत करना धीरे धीरे चुका देना

बुढ़ी औरत कुछ कह पाती उसके पहले ही गुप्ता जी घर की ओर रवाना हो गए।घर पहुंचकर उन्होंने पत्नी से कहा, न जाने क्यों हम हमेशा मुश्किल से पेट पालने वाले, सामान बेचने वालों से मोल भाव करते हैं किन्तु बड़ी दुकानों पर मुंह मांगे पैसे दे आते हैं। शायद हमारी मानसिकता ही बिगड़ गयी है।

अगले दिन गुप्ताजी ने बूढी औरत को कुछ और रूपये देकर मदद की और कहा,माई लौटाने की चिंता मत करना। जो सब्जी फल खरीदूंगा, उनकी कीमत से ही चुक जाएंगे।

गुप्ता जी ने ऑफिस मे ये किस्सा बताया तो सबने बूढी औरत से ही फल सब्जी खरीदना प्रारम्भ कर दिया।

कुछ महीने बाद ऑफिस के लोगों ने मिलकर बूढी औरत को एक ठेला भेंट कर दिया ,अब बहुत खुश है।उचित खान पान के कारण उसका स्वास्थ्य भी पहले से बहुत अच्छा हो गया ।

हर दिन गुप्ता जी और ऑफिस के दूसरे लोगों को दुआ देती नही थकती। गुप्ता जी व ऑफिस के लोगो के मन मे एक असहाय गरीब निर्बल महिला की सहायता करने की खुशी के साथ संतुष्टि का भाव रहता है

चाहे कोई धर्म करो या ना करो पर किसी निर्बल असहाय गरीब की मदद करना भी बहुत बडा धर्म है । जीवन मे किसी बेसहारा की मदद करके तो देखो ,अपनी पूरी जिंदगी मे किये गए सभी कार्यों से ज्यादा सुकुन व संतोष मिलेगा…


Image credit google

आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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