माता पिता व बच्चो से जुड़ी प्रेरणादायी बात # प्रेरणादायी बात # जिंदगी की किताब (पन्ना # 412)

माता पिता व बच्चो से जुड़ी प्रेरणादायी बात …

एक बहुत brilliant लड़का था ,सारी जिंदगी first आया । science में हमेशा 100% स्कोर किया । अब ऐसे लड़के आम तौर पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं, सो उसका भी सिलेक्शन IIT चेन्नई में हो गया । वहां से B Tech किया और वहां से आगे पढने अमेरिका चला गया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफ़ोर्निया से MBA किया।

अब इतना पढने के बाद तो वहां अच्छी नौकरी मिल ही जाती है ,उसने वहां भी हमेशा टॉप ही किया ।वहीं नौकरी करने लगा , पॉच बेडरूम का घर था उसके पास ।शादी वहॉ चेन्नई की ही एक बेहद खूबसूरत लड़की से हुई ।

एक आदमी और क्या मांग सकता है अपने जीवन में ? पढ़ लिख के इंजिनियर बन गए, अमेरिका में सेटल हो गए, मोटी तनख्वाह की नौकरी, बीवी बच्चे, सुख ही सुख।

लेकिन दुर्भाग्य वश आज से चार साल पहले उसने वहीं अमेरिका में, सपरिवार आत्महत्या कर ली । अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मार कर खुद को भी गोली मार ली ।What went wrong? आखिर ऐसा क्या हुआ, गड़बड़ कहाँ हुई ।

ये कदम उठाने से पहले उसने बाकायदा अपनी wife से discuss किया, फिर एक लम्बा suicide नोट लिखा और उसमें बाकायदा अपने इस कदम को justify किया और यहाँ तक लिखा कि यही सबसे श्रेष्ठ रास्ता था इन परिस्थितयों में ।उनके इस केस को और उस suicide नोट को California Institute of Clinical Psychology ने ‘What went wrong?‘ जानने के लिए study किया ।

पहले कारण क्या था ? वह suicide नोट से और मित्रों से पता किया। अमेरिका की आर्थिक मंदी में उसकी नौकरी चली गयी । बहुत दिन खाली बैठे रहे ।नौकरियां ढूंढते रहे ,फिर अपनी तनख्वाह कम करते गए और फिर भी जब नौकरी न मिली, मकान की किश्त टूट गयी, तो सड़क पर आने की नौबत आ गयी । कुछ दिन किसी पेट्रोल पम्प पर तेल भरा करते थे ,ऐसा बताते हैं ।साल भर ये सब बर्दाश्त किया और फिर पति पत्नी ने अंत में ख़ुदकुशी कर ली…

इस case study को ऐसे conclude किया है experts ने : This man was programmed for success but he was not trained,how to handle failure. यह व्यक्ति सफलता के लिए तो तैयार था, पर इसे जीवन में ये नहीं सिखाया गया कि असफलता का सामना कैसे किया जाए ।

अब उसके जीवन पर शुरू से नज़र डालते हैं. पढने में बहुत तेज़ था, हमेशा फर्स्ट ही आया ।ऐसे बहुत से Parents को मैं जानता हूँ जो यही चाहते हैं कि बस उनका बच्चा हमेशा फर्स्ट ही आये, कोई गलती न हो उस से ।गलती करना तो मानो कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया । हमेशा बच्चे first आये इसके लिये वो सब कुछ करते हैं ।फिर ऐसे बच्चे चूंकि पढ़ाकू कुछ ज्यादा होते हैं सो खेल कूद, घूमना फिरना, लड़ाई झगडा, मार पीट, ऐसे पंगों का मौका कम मिलता है । बेचारों 12 th कर के निकलते है तो इंजीनियरिंग कॉलेज का बोझ लद जाता ,वहां से निकले तो MBA और अभी पढ़ ही रहे थे की मोटी तनख्वाह की नौकरी । अब मोटी तनख्वाह तो बड़ी जिम्मेवारी यानी बड़े बड़े targets.

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कमबख्त ये दुनिया बड़ी कठोर है और ये ज़िदगी अलग से exam लेती है ।आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट से कोई मतलब नहीं उसे । वहां कितने नंबर आये ,कोई फर्क नहीं पड़ता ।ये ज़िदगी अपना अलग question paper सेट करती है और सवाल सब out ऑफ़ syllabus होते हैं ,टेढ़े मेढ़े, ऊट पटाँग । रोज़ exam लेती है ये जिन्दगी और कोई date sheet नहीं ।

एक अंग्रेजी उपन्यास में किस्सा पढ़ा था । एक मेमना अपनी माँ से दूर निकल गया ,आगे जा कर पहले तो भैंसों के झुण्ड से घिर गया ।उनके पैरों तले कुचले जाने से बचा किसी तरह । अभी थोडा ही आगे बढ़ा था कि एक सियार उसकी तरफ झपटा । किसी तरह झाड़ियों में घुस के जान बचाई तो सामने से भेड़िये आते दिखे । बहुत देर वहीं झाड़ियों में दुबका रहा, किसी तरह माँ के पास वापस पहुंचा तो बोला “माँ “वहां तो बहुत खतरनाक जंगल है. Mom, there is a jungle out there.

इस खतरनाक जंगल में जिंदा बचे रहने की ट्रेनिंग बच्चों को अवश्य दीजिये ।

बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार भी देना जरूरी है । हर परिस्थिति को ख़ुशी ख़ुशी धैर्य के साथ झेलने की क्षमता, और उससे उबरने का ज्ञान और विवेक बच्चों में होना ज़रूरी है।बहुत जरूरी है कि जिस प्रकार माता पिता बच्चो को सफल जीवन जीने के लिये मार्गदर्शन करते है ,उसी तरह उन्हे असफलता मिलने पर उस परिस्थिति से बाहर निकलने के लिये भी शिक्षा अवश्य दें।

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आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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