प्रेरणादायी कहानी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 408)

आज रविवार का दिन था । मीनू अपने बच्चों को लेकर पास के मेले गई । वहॉ पर काफी रौनक़ ही रौनक़ थी । तरह तरह की दुकानें आकर्षक सामान से सजी थी । बच्चे झूले का आनंद ले रहे थे । वही एक कोने में एक छोटा सा बच्चा जिसका नाम चिंटू था , उसको रंगबिरंगे बेलून बेचते देखकर मीनू ठिठकी | उसने देखा कि वह बच्चा सभी को ख़रीदने के लिये गुहार लगा रहा कि खरीद लो साहब , मैडम ! मेरी बीमार मॉ को दवाईयॉ व फल खाने की बहुत जरूरत है । इसकी कीमत ज्यादा है और बहुत ही कम दाम बोलकर वो लोग आगे चले जाते । बड़ी मुश्किल से थोड़े बेलून बिके । उसको शायद घर जाने की जल्दी थी इसलिये वह थोड़े पैसो को लेकर चला गया । मीनू को कही न कही से दिल कचोट रहा था ,उससे बेलून ना ख़रीदने का । लेकिन बेलून की जरूरत नही थी और सबसे यह कहते सुना कि ये लोग जानबूझकर मनगढ़ंत कहानी बनाकर सामान बेचते है ।लेकिन मन माना नही और सोचा की इसका पीछा करती हूँ ताकि सच्चाई का पता चले । चिन्टू पास ही की कोई बस्ती मे गया । वहॉ से कुछ दवाईयॉ ख़रीदी व बाद मे अपने घर जो घासफूस व लकड़ी का इस्तेमाल करके छोटी सी झोपड़ी थी ,उसमे गया । वहॉ प्रवेश द्वार पर कपडे से पर्दा किया हुआ था ।

उसने पर्दा एक तरफ किया जहॉ उसकी मॉ एक चारपाई पर लेटी दर्द से क़राह रही थी ।वह जाते ही अपनी मॉ पर गीले कपड़ों की पट्टी करने लगा शायद बुखार उतारने के लिये । बाद मे उसे दवाई पिलाई और बोला कि मॉ अब तुम बहुत ही जल्दी ठीक हो जाओगी । मै फल दुकान मे ही भूल गया , अभी जाकर लाता हूँ जब तक तुम सो जाओ , मेरी चिन्ता ना करना । और वह बाहर रखे बेलून को मेले मे फिर से बेचने चला गया ।

भारी मन से मीनू भी वापस मेले मे आ गई और वह चिन्टू के पास जाकर रूक गई । उसके रुकते ही चिन्टू बेलून को मज़बूती से पकड़ते हुये बोला कि ऑटी कितने बेलून दूँ ।

मीनू बोली कि बेलून तो बड़े सुन्दर हैं ,बिल्कुल तुम्हारी तरह ।सारे ले लूँ तो ?

आश्चर्य से बोला , आप सारे लेगी ? यहॉ तो जो भी लोग गुज़रते है वह तो एक भी नहीं ले रहें है | महंगा कहकर सामने वाली चायनीज सामान की दुकान से बेलून खरीदने चले जाते हैं|

उसकी बात सुनकर मीनू मुस्कुराती हुई बोली कि ये लो पॉच पॉच सौ के दो नोट सारे बेलून के लिये ।

पांच सौ के दो नोट पाकर चिन्टू खुशी से फूला ना समाया और सोचने लगा कि अब मॉ के लिये फल के साथ कुछ खाने की चीज़ें भी ले जाऊँगा ।मॉ बिना खाने के कितनी कमज़ोर हो गई है ।

क्या सोच रहे हो बेटा ? ये रूपये कम है ?

“नहीं अॉटी , आपने तो इतने रूपये दिये कि अब मेरी बीमार मॉ जल्दी ही ठीक हो जायेगी और वह दौड़कर जाने लगा ताकि मॉ को जल्दी से जल्दी फल व खाना खिला सके।

आज एक गरीब मासूम बच्चे से बेलून ख़रीदने पर मीनू को जो खुशी मिली शायद वह खुशी उसको हजारो लाखों की वस्तु खरीदने पर भी कभी महसूस नही होती । आज मीनू को बहुत ही आत्मिक संतोष था ।

हम सबके के लिये कितनी अजीब बात है ना ?

इंसान कितनी बारीक चीजें ignore कर देता है..जाहिर सी बात है की जो वेटर को पचास रूपये tip दे सकते है..वो किसी जरूरतमंद गरीब इंसान को किसी वस्तु के बिना मोलभाव किये दस रुपये भी तो अधिक दे सकते है ।

लेकिन सामन्यतया आदमी का स्वभाव इतना लचीला नहीं हो पाता क्योंकि उसने अपने आप को दूसरे की जगह रखकर कभी देखा नही और आज के भागदौड़ वाले दौर में ये सब सोचने की फुर्सत किसके पास है ?

कई बातें हैं…बस यही कहूंगी कि ज़रूरतमंद गरीब इंसानों से ज्यादा मोल भाव मत करिये । जब हम वेटर या ब्यूटी सैलून या अन्य कोई जगह tip देने से गरीब नहीं होते तो जरूरतमंद वाले को पांच रुपया अधिक देने से हम गरीब नहीं हो जायेंगे ।

हो सकता है कि हमारे इस पैसे से वो आज अपने नन्हे बच्चों के लिये चॉकलेट , आइसक्रीम लेकर जाए…तब उनकी ख़ुशी देखने लायक होगी ना !

जरा झांकिए जरूरतमंद की आँखों में एक बार …

इनके माँ बाप बहन बेटा बेटी की हजारों उम्मीदें हमारी उम्मीद से घूरती मिलेंगी..

हमारे चंद रुपये से किसी के नन्हे मासूम पहली बार स्कूल जायेंगे ।

किसी की बहन बेटी की शादी होगी ।

किसी बुज़ुर्ग की लाठी , चश्मा आयेगा ।

किसी बीमार की औषधि , फटे पुराने जूते की जगह नये चप्पल आयेंगे , भूखे का पेट भरेगा ….

ऐसा है ना हमने आज तक लेने का ही सुख चखा है लेकिन जब देना शुरू करेंगे तब महसूस होगा कि लेने से ज्यादा आनंद देने में है।


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏