मॉ की याद # ( जिंदगी की किताब (पन्ना # 406)

जिनकी मॉ इस संसार मे नही है उनकी याद मे चंद पंक्तियाँ ….

एक माँ जिसको सृष्टि ने सम्पूर्ण रचित किया है चूँकि सृष्टि को रचने वाला जिसे हम भगवान कहते हैं,वह हर पल ,हर घर में उपस्थित नहीं हो सकता, अतः माँ को बनाकर वह इतना निश्चित हो गया कि उसने माँ को अपना साझेदार बना लिया

माँ से ही हम सब बने है। माँ धरती की तरह ही सब कुछ सहन कर लेती है माँ नही तो हमारा अस्तित्व ही नहीं। माँ को शारीरिक रूप से अवश्य खो देते हैं लेकिन हमेशा के लिए माँ गंगा की तरह बहती है। उसकी आभा हर पल है चूँकि माँ के कारण ही हम है। उसके प्यार की तो कोई परिभाषा है ही परिभाषित किया जा सकता है।

संसार के निर्माता के नियमों में एक शाश्वत सत्य है कि जन्म है तो मृत्यु भी हैं ,लेकिन आत्मा अमर हैं ।सभी नतमस्तक है किसी ने एक सत्य बात कही है कि जैसे भगवान है पर दिखते नहीं हैं ठीक उसी तरह माँ हैं लेकिन दिखती नहीं क्योंकि माँ और भगवान दोनों आपके हमारे सबके भीतर ही हैं

मिले मन के भीतर माँ और भगवान

माँ तुझे नमन

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

Photo credit google

Advertisements