बेटियॉ # जिंदगी की किताब (पन्ना #403)

बेटी के जन्म होने पर घर मे खुशियॉ ही खुशियॉ छा गई । बेटी की बचपन से ही आदत थी कि वह अपने जन्मदिन आने के एक सप्ताह पहले से ही कहने लगती कि पापा आपने गिफ्ट ले लिया ? मै जानबूझकर मुस्कराकर कहता कि नही लिया और वो गुस्से से मुँह फुलाकर घूमती ।फिर जन्मदिन वाले दिन उसे सरप्राइज़ मिलता तो बहुत खुश होती ।

समय कैसे पंख लगाकर उड़ा , मालूम ही नही चला और देखते देखते उसकी शादी हो गई । ऐसा लगा कि जैसे घर की रौनक ही चली गई क्योंकि निःसंदेह बेटियाँ घर में मधुर संगीत की तरह होती हैं जिसकी झंकार से हर समय घर मे गूँजती है ।

वह बहु बनकर अपने ससुराल चली गई I इस बार जन्मदिन पर वो ससुराल में थी । मैं भी गिफ्ट खरीद कर वहीँ जा पहुँचा । हमेशा की तरह इस बार भी उसको सरप्राइज़ देने की नीयत से दबे पैर उसके घर में दाखिल हुआ ।

अंदर बेटी के रोने और उसके पति और सास के लड़ने की आवाज़ें बाहर तक आ रही थी । कलेजा मुँह को आ गया और बिना मिले चुपचाप बोझिल पैरो से वापिस पलटा और बाहर सड़क पर आ गया । मैंने फोन पर उसके ससुराल आने की ख्वाहिश ज़ाहिर की तो वह बोली कि पापा आज मत आना, हम बाहर डिनर करने आएं हैं । आज मेरा बर्थडे है ना ….

आज मालूम चला कि नाज़ुक , चुलबुली और ज़िद्दी दिखने वाली ये बेटियाँ समय के साथ खुद को कितना बदल लेती है ? ..

ऐसा बलिदान केवल एक लडकी ही कर सकती है,

इसीलिये दोस्तो हमेशा लडकी की झोली वात्सल्य से भरी रखना ।

बेटियॉ को शादी से पहले संस्कार व शादी के बाद परंपराओं का चोला पहना दिया जाता है।

कुछ गलत होने पर किस्मत का या कर्म का नाम दे दिया जाता है ।

जिंदगी तो उसकी भी होती है ,एक पल जीने को तरस जाती है ।फिर भी इन चलती सांसों को उसने जिंदगी का नाम दे दिया।

किसी ने सच कहा है –

बेटियाँ सब के मुक़द्दर में कहाँ होती हैं,घर खुदा को जो पसंद आये वहाँ होती हैं

सभी बेटियों को समर्पित ……


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Image credit google

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