Quote #

नारी हूँ मै ,अपनों के लिए जीती हूँ

सबको खुश रखने की कोशिश करती हूँ

शायद इसलिए अपनों के साथ ,दिल खोलकर मुस्कुराती हूँ

पर उस मुस्कान के अंदर, मुझे रोना पड़ता है

अपने आंसुओ से कभी-कभी,खुद को धोना पड़ता है


Women

Wo men से कम नही


जिससे घर बनता है वह घरवाली

जिसका गृह (घर) ऋणी हो वह गृहिणी

इन नामो मे ही सब अहसास छुपा है

फिर नारी क्यो अपने आप को लाचार व मजबूर समझती है कि

उसका वजूद नही होता ,अपना घर नही होता

नारियों अपने को कमजोर ना समझो ,अपनी सोच को बदलो


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

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