Quote # सुविचार

समाज बारह लोगों का बना है

चार सच्चे

चार कच्चे

और चार लुच्चे

हमें सबको स्वीकार करके

आगे बढ़ते रहना है


कटु सत्य

ठंडी रोटी अक्सर उनके नसीब में होती है

जो अपनों के लिए कमाई करके देरी से घर लोटते हैं


पता नहीं क्यों लोग रिश्ता छोड़ देते हैं मगर ज़िद नहीं छोड़ते


क्यों भरोसा करें गैरो पर

जबकि हमें चलना है

अपने ही पैरों पर


कूड़े के ढेर में फेंकी रोटीयां

रोज ये बया करती है कि

पेट भरते ही इंसान अपनी औकात भूल जाता है


दूसरों की छांव में खड़े रहकर हम अपनी परछाई खो देते हैं

अपनी परछाई के लिये हमें धूप में खड़ा होना पड़ता है


अपना दर्द सबको ना बताए

क्योंकि सबके घर में मरहम नहीं होता

मगर नमक हर एक के घर में होता है


जो हमारा दिल हमसे कहे वही करना चाहिये क्योंकि जो दिमाग कहता है वो मज़बूरी होती है

और जो दिल कहता है वो मंजूरी होती है


मैंने बचपन में एक बार मां से कहा

मां कूड़ेवाला आया है

मां ने कहा ,बेटा कूड़े वाले तो हम हैं, वो तो सफाई वाला है


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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