क्यूँ ठीक बोला ना ? # जिंदगी की किताब (पन्ना # 397)

क्यूँ ठीक बोला ना ? ….

पैसा देकर कैद होने का स्थान …….सिनेमा

बिना पैसे का होस्टल …….कैदखाना

बहू के पीछे छोडा गया बिना पैसे का जासूस ….सास

वजन कम करने की सबसे सस्ती दवा…….चिन्ता

बिना वेतन का चौकीदार …..ताला

गॉव की अलार्म घडी …….मुर्गा

जादूई आँख …..चश्मा

बिना पैसे की फिल्म ….ड्रीम (सपने)

रोगियों की लाईब्रेरी ……हॉस्पिटल

कलयुग का अमृत …..चाय, कॉफी , कॉल्ड ड्रिंक

रात का शरीफ व्यापारी …..,चोर

दुनिया एक सराय है ,जहॉ आते जाते मुसाफिर सबकी एक ही अंतिम राह है ….. मृत्यु

सबसे बडी अदालत जहॉ किसी की नही चलती वकालत …… ईश्वर

सबसे बडा आश्चर्य …. आत्मा

और अंत में

एक ऐसा मिठाई जो खाये तो पछताये, ना खाये तो पछताये …..शादी का लड्डू

एक लाइलाज नशा , जिसने सबको जकड़ा है……,,फेसबुक और व्हाट्सएप, ट्विटर इंस्टाग्राम …

🙂😀😀😜😜😀😀

हँसते रहिये , हँसाते रहिये … इसी का नाम है जिन्दगी


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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