जिन्दगी क्या है # जिंदगी की किताब (पन्ना # 394)

जिंदगी क्या है ?

कवियत्री मुक्ता सिंह जी की कविता दिल को छू गई । उन्होने बहुत ही खूबसूरती से कुछ पंक्तियाँ मे जिंदगी क्या है , बख़ूबी दर्शाया है …..

कभी-कभी मन में उठता है ये सवाल,

जिंदगी क्या है ?

क्या ये ईश्वर का दिया अनमोल तोहफा है,

या है उलझनों से भरा समंदर ,

जिसका दूर-दूर तक ना दीखता है किनारा ,

या वो बेजान टापू जहाँ जीवन की आस नहीं।

या इस दुनिया में आने, पे वो पहली किलकारी,

या माँ का गोद, जो आँचल में समेटे है दुनिया सारी,

या बारिश की वो पहली फुहार, जो देती है जीवन

या पतझड़ के बाद आया सावन,

जो किसानो को देता है नवजीवन ।

तभी दूर मन के एक कोने से आई आवाज़

जिंदगी तो है एक कोरा कागज

जैसा चाहो सजाओ।

श्री गणेश होती है, पहली किलकारी से,

रंगो की शुरुआत होती है, माँ के आँचल से,

किताब बनती है, जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों से,

कहानियां बनती है ,जीवन की घटनाओं से,

कवितायें बनती है ,हमारी खुशियों से,

नाटक बनता है , साजिशों से,

चाहे प्यार का हो या नफरत की

और अलंकार सजते हैं दुखों से


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Advertisements