नारी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 393)

❤️ नारी को जेवर, कपडे, धन दौलत नही बल्कि

सहानुभूति , सम्मान,बिना कहे समझने वाला हमसफ़र का प्यार चाहिये

❤️ मित्र की तरह बतियाने वाला ,अकेलापन दूर करने वाला व महत्व देने वाला सच्चा साथी चाहिये

❤️ तन , मन से थकहार कर बैठे तब तारीफ के साथ दो मीठे बोल बोलने वाला एक प्यारा सा पति चाहिये

❤️ उसकी रूचि व भावनाओं का कद्र करने वाला जीवन साथी का संग चाहिये

❤️ महँगा गिफ्ट ना ही सही पर surprise मे एक गुलाब भी उसका चेहरा खुशी से लाल करने वाला पति चाहिये

❤️ कुछ नहीं कहती ,कुछ नहीं मांगती ,कुछ नही चाहती

बस छोटी-छोटी खुशियां होती है औरतों की


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏