सोच का जादू # जिंदगी की किताब (पन्ना # 392)

सोच बदलो , जिन्दगी बदल जायेगी

यदि हम अस्पताल जाते है वहॉ सारे शरीर से पीड़ित लोगो को देखते है तो मन मे भी पीड़ा का अनुभव होता है बीमारी को लेकर अनेक आकांक्षा उठने लगती है मन भी उसको लेकर भयभीत हो जाता है इसी तरह जब शादी या कोई खुशी वाली माहौल मे जाते है तो भीतर खुशी की तरंगें उठने लगती है दुनिया खूबसूरत लगती है कॉमेडी फ़िल्म देखते है तो मन मे खुशी का संचार होता है , इमोशनल देखने पर भी इमोशनल हो जाता है श्मशान या मृत्यु वाले घर मे जाते ही मन मे वैराग्य उठने लगता है निराशा का अनुभव होने लगता है , जिन्दगी असार लगती है जब हम साधु संत की वाणी सुनते है तो मन को ठंडक पहुँचती है शांति का अनुभव होता है , जिन्दगी मे भय को दूर करता है या कोई धार्मिक माहौल मे जाते है तो मन मे सकारात्मक ऊर्जा का प्रादुर्भाव होता है

कहने का तात्पर्य यह है कि हम जैसे माहौल मे जाते है वैसी ही ऊर्जा पाते है

सोचने वाली बात यह है कि यदि हम कभी कभी जाने पर भी मन पर इस तरह का प्रभाव पड़ता है इस प्रभाव को अनुभव करते है वैसी ऊर्जा पाते है तो जहॉ हम रोज रहते है यानि घर मे , वहॉ पर कौनसी ऊर्जा दे रहे है ?

यदि हम पॉज़िटिव रहेंगे खुशी का माहौल रखेंगे तो घर मे वैसी ही तरंगों का विस्तार होगा , हमारे घर मे खुशी की परत बनने लगेगी जिसको एक अंजान इंसान भी घर मे प्रवेश होते समय अनुभव करता है बोलता है कि इस घर के वाईब्रेशन अच्छे है यहॉ तक कि ऐसे इंसान के साथ बात करने को भी मन करेगा हमारा मन प्रसन्नचित रहेगा

इसके विपरित यदि हम निराशा के भाव के साथ गमगीन रहेंगे तो हमेशा दुखी दुखी रहेंगे तो कोई हमारे पास बैठना भी पसंद नही करेगा साथ जिन्दगी के जीने का मज़ा तो ख़त्म करती ही है साथ मे हमारे कुछ करने की चाहत को भी रोकती है जिन्दगी बोझ लगने लगती है

इसलिये हमेशा कहा जाता है कि ज्यादा से ज्यादा उन लोगो की संगति मे रहो जो ख़ुशमिज़ाज पॉज़िटिव सोच वाले होते है ।उनकी संगत की रंगत आते ही मन मे अच्छे अच्छे विचार आने के साथ मन मे एक नई उमंग के साथ जीने की तरंगें उत्पन्न होती है

फ़ैसला हमारे हाथ मे है कि हमे जिन्दगी कैसे बितानी है


आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

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