एक तमाचा दहेज लोभियो को # जिंदगी की किताब (पन्ना # 387)

एक तमाचा दहेज लोभियो को ….

बहू घर के काम निपटाने के बाद मे मेरे सिर पैरों पर मालिश कर दिया करो

मॉजी मुझसे इतना सब नहीं हो पायेगा,सारा दिन काम करते करते बहुत थक जाती हूँ

शर्म नहीं आती तुम्हें इस तरह का जवाब देते हुये क्या यही संस्कार दिये हैं तुम्हारी मॉ ने ?

मॉजी आप किस संस्कार की बात कर रही है ?

वो तो आपने माँगा ही कहाँ था ?

शादी के चंद दिनों पहले आपने जिन सामानों की लिस्ट भिजवाई थी ,उसमें संस्कार का तो कहीं जिक्र नहीं था।

आपकी माँग को पूरा करने के लिए जब माँ ने अपने गहने और जमीन गिरवी रखे तो मैंने भी उनके दिए हुए संस्कार गिरवी रख दिये ….


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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