तकरार # जिंदगी की किताब (पन्ना # 391)

तकरारप्रेरक कहानी

आपने संत कबीर का नाम जरूर सुना होगा ।संत कबीर को शांतिमय जीवन प्रिय था और वे अहिंसा, सत्य, सदाचार आदि गुणों के प्रशंसक थे। अपनी सरलता, साधु स्वभाव तथा संत प्रवृत्ति के कारण आज विदेशों में भी उनका समादर हो रहा है।उनसे जुड़ा एक बहुत प्रेरक प्रसंग है

संत कबीर रोज सत्संग किया करते थे। दूर दूर से लोग उनकी बात सुनने आते थे। एक दिन सत्संग खत्म होने पर भी एक आदमी बैठा रहा।कबीर ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, मुझे आपसे कुछ पूछना है। मैं गृहस्थ हूं, घर में सभी लोगों से मेरा झगड़ा होता रहता है मैं जानना चाहता हूं कि मेरे यहां गृहक्लेश क्यों होता है और वह कैसे दूर हो सकता है ?

कबीर थोड़ी देर चुप रहे, फिर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा ,लालटेन जलाकर लाओ ।कबीर की पत्नी लालटेन जलाकर ले आई।वह आदमी आश्चर्यचकित होकर देखता रहा।सोचने लगा इतनी दोपहर में कबीर ने लालटेन क्यों मंगाई ?

थोड़ी देर बाद कबीर पत्नी से बोले, कुछ मीठा लाना इस बार उनकी पत्नी मीठे के बजाय नमकीन देकर चली गई।

उस आदमी ने सोचा कि यह तो शायद पागलों का घर है। मीठा के बदले नमकीन, दिन में लालटेन

वह बोला, कबीरजी मैं चलता हूं।

कबीर ने पूछा, आपको अपनी समस्या का समाधान मिला या अभी कुछ संशय बाकी है ? वह व्यक्ति बोला, मेरी समझ में कुछ नहीं आया।

कबीर ने कहा, जब मैंने लालटेन मंगवाई तो मेरी पत्नी कह सकती थी कि तुम सठिया गए हो क्याइतनी दोपहर में लालटेन की क्या जरूरत ? लेकिन उसने सोचा कि जरूर किसी काम के लिए लालटेन मंगवाई होगी।

मीठा मंगवाया तो नमकीन देकर चली गई। हो सकता है घर में कोई मीठी वस्तु हो। यह सोचकर मैं चुप रहा इसमें तकरार क्या ?आपसी विश्वास रखने तकरार में फंसने से विषम परिस्थिति अपने आप दूर हो गई।

उस आदमी को हैरानी हुई वह समझ गया कि कबीर ने यह सब उसे बताने के लिए किया था।

कबीर बोले कि गृहस्थी में आपसी विश्वास से ही तालमेल बनता है पति से गलती हो तो पत्नी संभाल ले और पत्नी से कोई त्रुटि हो जाए तो पति उसे नजर अंदाज कर दे। यही गृहस्थी का मूल मंत्र है।

दोस्तो स्त्री पुरुष के विवाह का मतलब दोनों पूरी जिन्दगी एक दुसरे के हमसफरजहॉ दोनो एक दुसरे के लिए सोचते हुये ,पूर्ण विश्वास पारदर्शिता के साथ कार्य करते हुये पूरा जीवन व्यतीत करते है


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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