कठोर सत्य # जिंदगी की किताब (पन्ना # 389)

कठोर सत्य ……

जब कोई इंसान इस दुनिया से विदा हो जाता है तो जल्दी से जल्दी उसके अंतिम संस्कार के लिये सोचा जाता है कोई भी उसके मृत शरीर को घर पर नही रखना चाहता उसके बाद उसके कपड़े, बिस्तर, इस्तेमाल किये गये सभी सामान को तुरन्त घर से बाहर कर दिया जाता है या दान दे दिया जाता है लेकिन कोई भी उसके घरप्रोपर्टी के कागजात , सोनाज़ेवरात ,रूपयापैसा इन सब को नही छोड़ना चाहता बल्कि उन चीजों को ढूँढा जाता है

इससे पता चलता है कि आखिर रिश्ता किन चीजों से था ?

इसलिये किसी ने कितनी सत्य पंक्तियाँ कही है ….

1. आप अकेला अवतरे, मरे अकेला होय

यो कबहुँ या जीव को , साथी सगो कोय

2. दलबल देवी देवता , मात पिता परिवार

मरती विरियॉ जीव को , कोई ना राखनहार

इसलिए जिन्दगी मे जितना हो सके पुण्य की कमाई करो यह ऐसी कमाई है जिसे कोई ले नही सकता, चुरा नही सकता बल्कि जाने वाले के साथ ही जाती है


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

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