जिंदगी की किताब (पन्ना # 383)

जन्माष्टमी का पर्व आया, तन मन को महकाया !!

एक वर्ष से आये हो तुम ,हर्षोल्लास को लाये हो !!

हर्ष , खुशी है सबके मन मे ,आओ पधारो मेरे मन मन्दिर !!
खुशी से पर्व मनाते हुये , करे कन्हैया के गुणों का बखान

अपनाये उनके गुणों की खान , हो जाये इस भवसागर से पार !!
काल कोठरी मे भी जन्म लेकर , दुनिया मे प्रकाश फैलाया

ये बात हमे सिखलाती है ,मनुष्य जन्म से नही कर्म से होता है महान !!
अंबर की तरह बनो विशाल , श्यामसुन्दर का कहता नीलवर्ण रूप !!
मोरपंख की तरह बनो पवित्र ,कहता भगवन का मयूरपंख मुकुट !!
महाउपकारी मॉ है हमारी ,गौ माता के संग बॉके बिहारी !!
बच्चो की तरह नटखट बनो ,कहते  माखनचोर मटकाफोड !!
मित्रता का व्यवहार सिखाती ,कृष्ण सुदामा की यारी बताती

चाहे दोस्त हो अमीर या गरीब ,भावनाओं के रहते क़रीब !!
यमुना तट पर बजा रहे ,कृष्णा कन्हैया अपनी प्यारी मुरली

रूठकर गोपियॉ बोली “हे नाथ” ,क्या हम आपको लगती नही प्यारी

हर दम मुरली को रखते हो पास ,लगता है प्राणो से भी ज्यादा ये प्यारी

अवगुणता से भरी पड़ी है ,काली और पोली है

फिर भी मुरली मनोहर वो , तुम्हे हमसे अधिक प्यारी है

बोले हँसकर कृष्ण कन्हैया  ,कितनी भी जलन हो उससे

चाहे वह काली हो या पोली ,फिर भी अधिक प्यारी है हमे !!

इसमें है ऐसे तीन विशेष गुण , सबसे न्यारे सबसे प्यारे

इंसानों अपनाये एक भी गुण ,पूजनीय हो जाये चहुँओर !!

गोपियॉ बोली जल्द बतलाओ हमरे नाथ ,कौनसे है वो तीन गुणों की खान

उतावली होती देख गॉपियो को ,मुस्करा कर बोले कुंज बिहारी !!

मुरली बिन बुलाये नही बोलती ,यह है उसका पहला गुण

दुनिया मे बिन बतलाये नही बोलना ,वाचाल की कही ना होती इज्जत !!
जब भी मुरली बोलेगी मधुर रस घोलेगी ,यह है उसका दूसरा गुण

हम इंसानों को भी अपनी वाणी मे ,मधुरता का रस लाना है

कटुवाणी ना भाती किसी को ,और लगती भी ना किसी को प्रिय

यदि जग को करना है वश मे ,इससे बड़ा ना होगा कोई महामंत्र !!
मुरली रहती है बिल्कुल सरल ,यह है उसका तीसरा गुण

हम इंसानों को भी बनना सरल , नही रखनी दिल मे कोई गॉठ

दॉव पेच करते जो हरदम , जिसके दिल मे होती गॉठ

कभी नही पा सकता वह ,उच्चपद को प्राप्त !!
कन्हैया के पैरों मे झुककर ,गॉपिया बोली हमारे नाथ

आपने दिया है हमे सच्चा ज्ञान ,जिससे थी हम सदा अंजान !!
गुण चाहे बडे हो या छोटे , सबको संग्राही है

जलना किसी के गुणों पर,यही मानव की बुराई है

जो तीनों गुणों को अपनाले ,वही गुणी बन सकता है !!
बनना है अगर सबको सुखद , पाना है सबका आदर सत्कार

हर हाल मे भी मुरली के इन तीन गुणों को अपनाना है !!
आओ पधारो हमारे मन मन्दिर, ज्ञान प्रकाश फैलाओ हमारे भीतर !!

द्वेष क्लेश को मिटाओ निरंतर ,प्रेम बढ़ावों मेरे कृष्ण गिरधर !!

आत्मांगण से दुर्गुण मल को ,पूरा मिटाओ हे मेरे नाथ !!

सजाये सभी सुखों को भीतर ,आओ पधारो हमारे नाथ !!

आओ मन का दीप जलाने ,जो लाये ख़ुशियों का पैग़ाम !!

तन मन मेरा अर्पण करके ,श्रीचरणो की शरण ले करके !!

तुम्हारी भक्ति मे मन को लगाऊँ ,विश्वास का दीप जलाऊँ

जो सबको राह दिखाते और सबकी बिगड़ी बनाते !!

मुबारक हो आप सबको ,जन्माष्टमी का त्यौहार !!

जन्माष्टमी की सभी को ह्रादिक शुभकामनायें 🙏🙏


आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

Advertisements