रूचि(hobby)# जिंदगी की किताब (पन्ना # 378)

रूचि को लेकर परिवार मे तु तु मै मै ……

🌸दो व्यक्तियों की रुचि अलग-अलग हो सकती है। एक कुछ सोचता है, दूसरा कुछ सोचता है और दोनों जब अपनी-अपनी रुचि के अनुरूप एक दूसरे को चलाने पर आमादा हो जाते हैं तो झगड़ा हो जाता है।

🌸जैसी आपकी रुचि है वैसा आपको वातावरण मिले, वैसा आपका साथ हो तो आपको कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन रुचि अलग हो तो बड़ी दिक्कत होती है।

🌸व्यक्ति के चिंतन को देखिये, उसकी अभिरुचि को देखिये और उसके अनुरूप बढ़ने की कोशिश कीजिये। अगर आप उसके चिंतन को बदलना चाहेंगे तो बड़ी गड़बड़ होगी।

🌸चिंतन बदलता है सही मार्गदर्शन से ना कि थोपने से, यदि आप उस पर थोप देंगे तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी।

🌸यदि आप बड़े युक्ति संगत तरीके से, प्रेम आत्मीयता से भरे लहज़े में समझाएंगे तो हर व्यक्ति का चिंतन बदल सकता है

🌸घर परिवार में चाहे आपके बच्चे हों, बहू हो उसकी रुचि को समझने की कोशिश करें। रुचि थोपिए मत ,रुचि बदलने की कोशिश कीजिये।

🌸चिंतन थोपिये मत। चिंतन को बदलने की राह दिखाइये ।यदि ऐसा हो जाए तो कभी किसी का जीवन खराब नहीं होगा और यदि ऐसा नहीं हुआ तो जीवन को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता।


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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