असली खूबसूरती # जिंदगी की किताब (पन्ना # 376)

असली खूबसूरती ….

आरती ने अपने बेटे रौनक की सगाई बुझे मन से काजल के साथ तय कर दी । एक सप्ताह बाद सगाई की रस्म रखी गई जिसमे काफी रिश्तेदारों को बुलाया गया । होने वाली वधू काजल व रौनक ने एक साथ पार्टी हॉल मे प्रवेश किया । दोनो और के सारे रिश्तेदारों की नज़रें काजल व रौनक पर गड़ी थी । काजल व रौनक को देखते ही रिश्तेदार आपस मे कानाफूसी करने लगे कि रौनक तो कितना गोरा चिट्टा हैंडसम लड़का है पर काजल तो काले रंग की है हालाँकि उसके नाकनक्श लुभावने थे । कुछ रिश्तेदारों ने तो आरती व उसके पति को मज़ाक़ मे बोल भी दिया कि भई पैसो वाली पार्टी देखकर रिश्ता तय किया है क्या ? समधीजी आपका पूरा घर भर देंगे । उनके जवाब मे रौनक के मॉ पिताजी यही बोलते कि क्या करे ,बेटे की पसंद है हमे तो मानना ही है … दहेज के लिये तो रौनक ने एकदम से मना कर दिया और बोला कि वह एक साड़ी मे काजल से शादी करेगा । पता नही उसने मेरे बेटे पर क्या जादू किया ,वह उसके अलावा किसी और से शादी के लिये हॉ भी नही भरता और उसने तो यहॉ तक बोल दिया कि वह शादी करेगा तो सिर्फ काजल से वरना कुँवारा ही रहेगा ।

कुछ ऐसे भी बोल देते कि काजल कितनी किस्मत वाली है जो उसे राजा जैसा राजकुँवर मिला है । बुआ जी ने तो यहॉ तक कह दिया कि रौनक बेटा तुमने फ़ैसला तो सोच समझकर लिया है ना ? रौनक ने जवाब दिया कि बुआजी यह सगाई मैने अपनी पसंद से की है , लव मैरिज है ।मुझे काजल से ज्यादा खूबसूरत लड़की कही और नही मिल सकती । ऐसा सुनकर सब मुँह बनाकर चले जाते ।

दो महीने बाद शादी हो गई । शादी मे वाकई मे रौनक ने कुछ भी नही लिया । शादी के बाद काजल ससुराल मे हर काम दिल से करती व ना आने पर सीखने की कोशिश करती । घर वालो की पसंद ना होने के कारण सब उसके साथ अच्छा व्यवहार नही करते व कटे कटे से रहते । सास कभी कभी ताना भी मार देती कि मेरे बेटे के लिये बडे बडे घर से कितने ही खूबसूरत लड़कियों के रिश्ते आये पर क्या करे बेटे के आगे झुकना पड़ा वरना …। काजल अपने साथ हो रहे व्यवहार को नजर अंदाज करती व ताने सुनकर भी चुपचाप मुस्कुराती और काम मे लगी रहती ।

एक दिन आरती घर मे फिसल कर गिर गई व उसे उठा भी नही जा रहा । बडी मुश्किल से अस्पताल ले जाया गया । पैर की हड्डी फ़्रैक्चर हो गई थी और उस पर प्लास्टर चढ़ाया गया । डॉ ने पूरा बेड रेस्ट बोल दिया । उसे पलंग के नीचे उतरना भी मना था ।

काजल ने रात देखा ना दिन, पूरे तन मन से सास की सेवा की । वही रौनक भी आँफिस के अलावा जो समय मिलता अपनी मॉ का पूरा ध्यान रखता । जल्दी ही आरती ठीक होने लगी ।

काजल का heartily सेवाभावी स्वभाव देखकर धीरे धीरे आरती प्रभावित होने लगी ।

हालचाल पूछने के बहाने रिश्तेदारों का आना जाना बहुत होता था । कभी रौनक की बुआ ,कभी मासि , कभी चाची तो कभी मामी .. कोई ना कोई कुछ दिनों के लिये आया करता । आते ही सबसे ज्यादा नजर काजल पर टिकी रहती ।

काजल का चेहरा हमेशा हँसमुख रहता व घर के साथ सास का व आने वालो का सबका बहुत ख़्याल रखती व बहुत ही अच्छे तरीके से बात भी करती । समय से खाना पिलाना ,दवाईयॉ देना, कपडे बदलना , बैठकर उनसे बातचीत करके मन बहलाना …. । रौनक भी उसके काम मे सहयोग देता था ।

जो भी आता व उनके यहॉ रूकता ,उन सबके साथ काजल दिल से अच्छा व्यवहार करती व साथ मे इधर उधर की बात करने की बजाय अच्छी अच्छी बातों का discussion करती ।इसलिये सभी को वहॉ रूकने पर बहुत अच्छा लग रहा था । इस वजह से किसी का भी ध्यान उसके रंगरूप पर नही गया बल्कि सबको उसमे गुण ही गुण दिखाई दे रहे थे ।

घर लौटते समय सभी के मुँह से यही निकलता कि आरती तु बहुत किस्मत वाली है जो बहू के रूप मे तुझे हीरा मिल गया है ।

आज आरती को अपने बेटे की पसंद पर नाज हो रहा था ,जिसने जिस विश्वास के साथ काजल मे रंगरूप ना देखकर उसमे ख़ूबियॉ देखी और उसी के आधार पर अपनी जीवनसंगिनी चुना और वह उसमे खरी उतरी ….

इसलिये किसी ने क्या खूब कहा है कि इंसान सूरत से नही सीरत से पहचाना जाता है ।

उसकी खूबसूरती अच्छे व्यवहार से निखरती जाती है ।


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

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