रिश्ते # जिंदगी की किताब (पन्ना # 375)

🌸रिश्ते टूटने का एक कारण दिखावा व competition भी है जिससे रिश्तो की स्वाभाविकता खत्म हो जाती है

🌸रिश्ते टूटने का सबसे बडा कारण आपसी अनबन, झूठा अहंकार है जिसकी क्रोधाग्नि मे आपसी रिश्ते भस्मीभूत हो जाते है

🌸रिश्तो से ज्यादा उम्मीदें व नासमझी व बातचीत बंद कर देने से दूरियाँ इतनी बढ़ जाती है कि अपने भी पराये हो जाते है फिर पछताने के अलावा कुछ हाथ नही लगता है

🌸इसीलिये जीवन मे ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नही है बल्कि जो रिश्ते है उसमे जीवन होना जरूरी है

🌸किसी भी रिश्ते की कामयाबी आपसी समझ , निस्वार्थ भावना व सौहार्द होने पर मिलती है

🌸विश्वास व अपनेपन की मिठास हमेशा रिश्तो को जिंदा रखती है व साथ मे संवेदनाओं को बचाये रखती है

🌸अच्छे रिश्तो की वजह से मन सुंदर बनता है व वसुधैव कुटुम्ब की भावना पनपती है

🌸देश मे इंसानियत का रिश्ता होगा तो लोगो मे अमन चैन व भाईचारे की फिजा महकने लगेगी ।

🌸सुन्दर रिश्तो के मीठे अहसास छोटी सी जिन्दगी मे भी बडी खुशियॉ भर देता है


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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