प्रेरक कहानी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 370)

साँझ ढले एक आदमी ने अंधकार मिटाने के लिये अपने घर मे छ: मॉमबतियॉ जलाई व बाहर चला गया ।

पहली मोमबत्ती जो जज़्बात की प्रतीक थी उसने कहा कि मेरी यहॉ कोई कीमत नही है जलकर क्या करूँ और वह बुझ गई । उसे देखकर दूसरी मोमबती जो शांति का प्रतीक थी उसने कहा कि कि मै चाहे कितना भी अपने आप को जला लू फिर भी तनाव ही डेरा लगाये रहता है , मेरा भी यहॉ क्या काम और वह भी बुझ गई । उसे देखकर तीसरी मोमबती जो उमंग का प्रतीक थी वह बोली कि मै अपने भी आप को इतना जलाये रखती हूँ फिर भी नीरसता ही छाई रहती है । इससे अच्छा यही होगा कि मैं बुझ जाऊं और वह मोमबत्ती खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गयी ।

जज़्बात , शांति व उमंग की मोमबत्ती बुझने के बाद चौथी मोमबत्ती जो हिम्मत का प्रतीक थी , सबको बुझते देखकर वह भी इस कदर टूट गई कि उसने सोचा कि अब मेरे जलने से भी कोई फायदा नही और वह भी बुझ गई ।

जज़्बात ,शांति ,उमंग और हिम्मत के न रहने पर पॉचवी मोमबती जो समृद्धि की प्रतीक थी उसने सोचा कि ये सब यहॉ नही है तो अब मेरा यहॉ क्या वजूद ? और उसने भी बुझना उचित समझा और बुझ गई

पॉचो मोमबतियो के बुझने के बावजूद अकेली छठी मोमबती ने अपने आप को बुझाया नही और जलती रही ।

थोडी देर मे उस आदमी ने घर मे प्रवेश किया । उसने देखा कि एक के अलावा सारी मोमबतियॉ बुझ गई है । वह पॉचो मोमबतियॉ को बुझी देखकर दुखी होने की बजाय इस बात पर खुशी से झूम उठा कि चलो कम से कम एक मोमबती तो जल रही है और उसने तुरंत जलती हुई छठी मोमबती उठाई और बाकी की पॉचो मोमबतियॉ फिर से जला दी ।

जानना चाहते हो दोस्तो वह पाँचवी मोमबती कौन थी ? वह मोमबती उम्मीद का प्रतीक थी ।

इसलिए दोस्तो चाहे जिन्दगी मे कितने भी उतार चढ़ाव आये, निराशा के बादल छाने लगे , मन मायूस होने लगे ,चारों और अँधकार ही अँधकार दिखाई देने लगे ,पर अपने मन में कभी भी उम्मीद की लौ को बुझने ना देना , हमेशा जलाये रखना । एक यही लौ काफी है बाकी और लौ को जलाने के लिए ।


लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

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4 Comments Add yours

  1. उम्मीद से सब कुछ मिलता है।

    Liked by 1 person

  2. Madhusudan says:

    khubsurat kahani.👌👌

    Liked by 1 person

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