नारी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 358)

देख नारी की हालत ,छलनी हो जाता है सीना ,

पैसा ,पद के दम पर,नारी की आबरू को छीना

पैसो के जो लालची , सौदेबाज़ी करते ना थकते

जैसे लडकी तो गुडिया है , खाने की पुडिया है

बनते फिरते दु:शासन ,आज चीर सब हरते

मॉ का मान भूल गये , अय्याशी मे डूब गये

ऐसे ही कमीने , आज बलात्कार करते

ज़िन्दा जब तन जले , न्याय कहॉ से मिले

इसलिये नारियों के दिल आज भी डरते

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नारी का सभी सम्मान करे

नारी जग की माता है ,सब है उसके लाल

जो भी उस पर कुदृष्टि डाले , खींचो उसकी खाल


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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