दर्द का अहसास # जिंदगी की किताब (पन्ना # 366)

दर्द का अहसास…..


आज गुड़िया शादी के बाद पहली बार ससुराल से मायके मे कुछ दिनों के लिये आ रही थी ,पूरे घर मे चहल पहल थी ।इकलौता भाई बाहर से उसकी मनपसंद की वस्तुये ला रहा था ,तो भाभी उसके पसंद की खाने की चीज़ें बना रही थी ।

ट्रेन आने के समय से पहले ही भाई स्टेशन जाकर खड़ा हो गया आखिरकार उनकी लाड़ली बहन जो आ रही थी । गुडियॉ भाई को देखकर खुशी से चहक उठी और जल्दी जल्दी एक के बाद सबका हालचाल पूछने लगी । आपस मे बतियाते बतियाते घर पहुँचे ।

वहॉ मॉ बापूजी व भाभी दरवाज़े पर इंतजार कर रहे थे । डिनर करने के बाद भी काफी समय तक सब बाते करते रहे ।जब काफी रात हो गई तब सब सोने चले गये ।

अचानक सुबह सुबह मॉ की तेज़ आवाज सुनकर गुडिया की ऑख खुल गई । वह फटाफट ब्रश व हाथ मुहँ धोकर बाहर आई तो देखा कि मॉ भाभी को आवाज लगा रही थी बहू अभी तक चाय बनी नही क्या ? भाभी की किचन मे से आवाज़ आई बस अभी लाई मॉ जी । गुडियॉ किचन मे गई तो देखा कि भाभी कितनी भागदौड़ कर रही है चाय नाश्ता तैयार करने मे । वह भी उनकी मदद करने के साथ हँस हँसकर अपनी दिल की बाते करने लगी । मॉ गुडियॉ को बाते करने के साथ काम करते देख हैरान हो गई और गुडियॉ को बोलने लगी अरे गुडियॉ तु ससुराल से थक कर आई होगी ,आराम कर ।चल बाहर चल ,दोनो साथ मिलकर चाय नाश्ता करते है और ज़बरदस्ती काम छुड़ाकर बाहर ले आई और ससुराल के बारे मे प्रश्न पूछने लगी ।

दस पन्द्रह मिनट बाद भाभी चाय व नाश्ता लेकर आई , जैसे ही मॉ ने चाय का एक घूँट पिया ,मुहँ बिगाड़कर तुरंत बोली बहू कितनी बार बोला है कि मुझे मींठी चाय पसंद है और तु मुझे फीकी चाय पिला रही है ,कहॉ रहता है तेरा दिमाग । गुडियॉ बोल उठी पर मॉ मेरी चाय मे तो सही मात्रा मे चीनी है । भाभी बोली कि मॉ आपको डायबिटीक है व डॉ ने मना किया इसलिये नही डाली । सुनते ही मॉ बोल पड़ी बड़ी आई मेरी डॉक्टर बनने और हॉ ये कम घी मसाले के सूखे परॉठे किस खुशी मे ? गुडियॉ बोल उठी मॉ आपको कॉलेस्ट्रोल व फैटी लिवर की कितनी तकलीफ बढ़ गयी है ,इसलिये भाभी ने कम घी व मसाला डाला है ।

अब तो मॉ का पारा सातवें आसमान पर चला गया और बोल उठी कि देख गुडिया तुझे कुछ नही मालूम ये लेट उठती है फिर जल्दी जल्दी के चक्कर मे कुछ भी कार्य ठीक प्रकार से नही करती । इस बार गुडियॉ थोड़ी तेज़ आवाज़ मे बोलने लगी कि मॉ आजकल सुबह पॉच बजे भला कौन उठता है । फिर उठकर करे भी क्या और सोती भी तो कितनी देरी से । मॉ कुछ ना कुछ बड़बड़ाती चुप हो गई ।

दोपहर को लंच के बाद मॉ गुडियॉ से बात करने लगी तो गुडिया बोली कि मॉ भाभी को भी बुला देते है । गुड़िया भाभी को आवाज लगाने वाली ही थी कि मॉ बोली रहने दे फिर तेरे से सारी बात खुलकर कैसे करूँगी । मॉ भाभी भी तो इस घर की सदस्य है , आप भी मॉ ….

तभी भाभी आई और मॉ से बोली कि “मॉजी “ मै मॉ को देख आऊँ , फ़ोन से पता चला कि उनकी तबियत ठीक नही है । सुनते ही मॉ बोली कि चली तो जाओ पर ज्यादा देर रूकनानही ,मॉ से मिलकर निकल जाना । गुडियॉ आई हुई है , शाम के खाने की भी तैयारी करनी है । ये सुनते ही गुड़िया तुरंत बोली मॉ भाभी का जितना मन करे उतना अपनी मॉ के पास रहने दो ना , उनकी भी बात करके तबियत हल्की हो जायेगी । ऐसे कौनसा आज ही जा रही हूँ , अभी तो कुछ दिन यही हूँ ना । खाना तो हम भी बना सकते है ।यह सुनते ही मॉ अवाक रह गई और बोली तु कब से भाभी की तरफदारी करने लगी । पहले तो हर बात मे मेरी हॉ मे हॉ मिलाती थी । अचानक तुझे क्या हो गया जो हर बात मे मुझे गलत ठहरा रही है ।

यह सुनते ही गुडियॉ रूऑसी होते हुये बोली कि मॉ पहले मै किसी की बहू व भाभी नही थी ……….


आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google 

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