दर्द का अहसास – जिंदगी की किताब (पन्ना # 225)

दर्द का अहसास…..

आज गुड़िया शादी के बाद पहली बार ससुराल से मायके आ रही थी ,पूरे घर मे चहल पहल थी । दोनो भाई बाहर से उसकी मनपसंद की वस्तुये ला रहे थे तो भाभीयॉ उसके पसंद की खाने की चीज़ें बना रही थी । ट्रेन आने के समय से पहले ही दोनो भाई स्टेशन जाकर खड़े हो गये आखिरकार उनकी इकलौती लाड़ली बहन जो आ रही थी । गुडियॉ भाईयों को देखकर खुशी से चहक उठी और जल्दी जल्दी एक के बाद सबका हालचाल पूछने लगी । आपस मे बतियाते बतियाते सभी घर पहुँचे । वहॉ मॉ बापूजी व दोनो भाभीयॉ दरवाज़े पर इंतजार कर रहे थे । ननद की आरती उतारने के बाद सभी भीतर गये । डिनर करने के बाद भी काफी समय बाते करते रहे जब काफी रात हो गई तब सब सोने चले गये । अचानक सुबह सुबह मॉ की तेज़ आवाज सुनकर गुडिया की ऑखे खुल गई । वह फटाफट ब्रश व हाथ मुहँ धोकर बाहर आई तो देखा कि मॉ भाभी को बोल रही थी “ओ महारानी “अभी तक चाय बनी नही क्या ? भाभी की किचन मे से आवाज़ आई बस अभी लाई मॉ जी । गुडियॉ किचन मे गई तो देखा कि दोनो भाभीयॉ कितनी भागदौड़ कर रही है चाय नाश्ता तैयार करने मे । वह भी उनकी मदद करने के साथ हँस हँसकर अपनी दिल की बाते करने लगी । मॉ गुडियॉ को बाते करने के साथ काम करते देख हैरान हो गई और गुडियॉ को बोलने लगी बाहर चल ,दोनो साथ मिलकर चाय नाश्ता करते है और ज़बरदस्ती काम छुड़ाकर बाहर ले आई और ससुराल के बारे मे प्रश्न पूछने लगी । दस पन्द्रह मिनट बाद भाभी चाय व नाश्ता लेकर आई , जैसे ही मॉ ने चाय का एक घूँट पिया ,मुहँ बिगाड़कर तुरंत बोली बहू कितनी बार बोला है कि मुझे मींठी चाय पसंद है और तु मुझे फीकी चाय पिला रही है ,कहॉ रहता है तेरा दिमाग । गुडियॉ बोल उठी पर मॉ मेरी चाय मे तो सही मात्रा मे चीनी है । भाभी ने बताया कि मॉ के डायबिटीक होने के कारण चीनी नही डाली । डॉ ने चीनी लेने के लिये मना किया है । सुनते ही मॉ बोल पड़ी बड़ी आई मेरी डॉक्टर बनने और हॉ ये कम घी मसाले के सूखे परॉठे किस खुशी मे ? गुडियॉ बोल उठी मॉ आपको कॉलेस्ट्रोल व फैटी लिवर की कितनी तकलीफ बढ़ गयी है ,इसलिये भाभी ने कम घी व मसाला डाला है । अब तो मॉ का पारा सातवें आसमान पर चला गया और बोल उठी कि देख गुडिया तुझे कुछ नही मालूम ये दोनो महारानियॉ लेट उठती है फिर जल्दी जल्दी के चक्कर मे कुछ भी कार्य ठीक प्रकार से नही करती । इस बार गुडियॉ थोड़ी तेज़ आवाज़ मे बोलने लगी कि मॉ आजकल सुबह पॉच बजे भला कौन उठता है । फिर उठकर करे भी क्या और सोती भी तो कितनी देरी से । यह सुनते ही मॉ अवाक रह गई और बोली तु कब से इन दोनो की तरफदारी करने लगी । पहले तो हर बात मे मेरी हॉ मे हॉ मिलाती थी । अचानक तुझे क्या हो गया जो हर बात मे मुझे गलत ठहरा रही है । यह सुनते ही गुडियॉ रूऑसी होते हुये बोली कि मॉ पहले मै किसी की भाभी नही थी ……….

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google 

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6 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    Bahut badhiya likha hai…

    Liked by 1 person

  2. दर्द का अहसास उस समय होता है जब हम उस परिस्थिति में स्वयं होते हैं।
    Nice and true story.

    Liked by 1 person

    1. Vimla wilson says:

      बहुत बहुत धन्यवाद

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