जीने का जज़्बा # जिंदगी की किताब (पन्ना # 343)

जीने का जज़्बा

एक बच्चा जो रंग से काला ,घुंघराले बाल, हब्सी जैसा चेहरा,सामान्य कपडे, फटी निकर , फटा पुराना शर्ट पहने किसी बाल मेले मे घूम रहा था । मेले मे हर तरह की दुकानें लगी थी ।वह एक जगह रूक गया जहॉ एक व्यक्ति ठेलागाडी पर आकाश छूने वाले कई रंगबिरंगे ग़ुब्बारे बेचने के लिये लगा रखे थे । गुब्बारे बेचने वाले को जैसे ही लगता कि ख़रीददार कम हो रहे है तब वह दस पन्द्रह ग़ुब्बारे की ताने तोड़ता व उनको हवा मे छोड़ देता तो बच्चे उन रंगबिरंगे उड़ते बेलून की तरफ आकर्षित होकर खरीददारी के लिये उसके पास चले आते ।

वह बच्चा पन्द्रह मिनट तक ये सब देख रहा था । आख़िर उसे रहा नही गया और उस दुकान वाले के पास गया और पूछने लगा कि अंकल आपकी दुकान पर ढेर सारे लाल , पीले , नीले , हरे तरह तरह के रंगबिरंगे बेलून है पर काला रंग का नही है , क्या वह भी इसी तरह आसमान मे उड़ सकता है ? ग़ुब्बारे वाले ने उस बच्चे का चेहरा मोहरा देखते ही समझ लिया वह बच्चा आखिर पूछना क्या चाहता है ? उसने प्यार से बच्चे के सिर पर हाथ फेरा और बोला कि बेटा एक बात तुम जिन्दगी मे गॉठ बॉध लेना कि कोई भी बेलून अपने रंग,रूप ,जाति के कारण आसमान की ऊँचाईयो को नही छूता है बल्कि वह उसमे भरी जाने वाली गैस की ताक़त की वजह से आसमान की ऊँचाईयो को छूता है । तुरंत उस बच्चे पूछा कि अंकल इसका मतलब यह हुआ कि अगर मै काले रंग का हूँ तो भी आसमान की ऊँचाइयों को छू सकता हूँ । ग़ुब्बारे वाला बोला कि बेटा कोई भी गुब्बारा आसमान पर पहुँचा है तो इसका कारण यह है कि मैंने उसमे हीलियम गैस भरी है । इसी तरह यदि तुम भी अपनी जिन्दगी मे ऐसी शक्ति या ताक़त भर डालो तो तुम्हारी जिन्दगी भी आसमान जैसी ऊँचाईयो को छू सकती है । ऐसा सुनकर लड़का तो वहॉ से चला जाता है लेकिन जिन्दगी का एक पैग़ाम हम सब के लिये छोड़ गया कि कोई भी इंसान अपने रंग , रूप और जाति के कारण महान नही होता , बल्कि अपने कर्मों के कारण ही उत्कृष्ट या निष्कृष्ट हुआ करता है ।

आपको मालूम है ,इस कहानी मे काला कलूटा , हब्सी जैसा चेहरा लिये जो बच्चा बाल मेले मे घूम रहा था वह कौन था ? वह दक्षिण अफ़्रीका का राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला था । उसने जीवन के जज़्बातों को समझ लिया व जीवन के जज़्बे को जगा लिया फिर वह बच्चा , बच्चा ना रहा , अपने जीवन मे संघर्ष करते करते एक दिन दक्षिण अफ़्रीका का राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला हो गया ।

इस कहानी का कहने का सार यह है कि व्यक्ति अपने रंग रूप , जाति के कारण छोटा या बड़ा नही होता है बल्कि अपने कर्म , गुण व कुछ करने के जज़्बा ही उसके महान व्यक्तित्व का आधार होता है ।

कई ऐसे लोग होते है जो बड़े व अमीर घर मे पैदा होते है लेकिन आगेजाकर ग़रीब व फटेहाल जिन्दगी जीते है व कुछ ऐसे भी लोग होते है जो छोटे घर मे गरीब व फटेहाल होकर भी आगे चलकर आसमान की बुलंदियों को छूते है । जैसे कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री , ए. पी . जे . अब्दुल कलाम ,अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ..जो गरीब घर मे पैदा हुये थे ।

निरमा वाशिंग पाउडर के मालिक करसन भाई पटेल किसी समय अहमदाबाद की सड़कों पर साइकिल और ठेलागाडी पर अपना माल बेचा करते थे ।

गरीब घर मे पैदा होना गुनाह नही है , लेकिन अपने मन को गरीब बना लेना अवश्य अपराध है ।

अपनी जिन्दगी बड़ी मूल्यवान है । अपने भीतर के जज़्बे को जगाने के साथ जिन्दगी को ऊँचाइयों तक ले जाना होगा । सफलता तो एक सफ़र है , मंजिल नही है । वह तो लगातार बढ़ने का नाम है ।


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    सफलता तो एक सफ़र है , मंजिल नही है । वह तो लगातार बढ़ने का नाम है ।बिल्कुल सही कहा।इसका कोई अंत नही।

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