ईश्वर से याचना क्यों,क्या भरोसा नही ?# जिंदगी की किताब (पन्ना # 328)

ईश्वर से याचना क्यों , क्या भरोसा नही ?

कहने को तो हम ईश्वर को याद करने के लिये मंदिर मे जाते है ,जप , तप , पूजा पाठ आदि क्रियाये करते है जो कही से गलत भी नही है लेकिन उस समय हमारा ध्यान रहता है कि हे प्रभु मुझे अच्छे अंकों से परीक्षा मे पास करवा दो ,संतान दो, बेटा दो , नौकरी दिलवा दो , बीमारी दूर करो , परिवार के दुख दर्द दूर करो ….आदि ना जाने कितनी ढेर सारी ख़्वाहिशें ! और तो और ,अमुक कार्य पूरा होने पर इतने का प्रसाद चढ़ाऊँगा यानि कि ईश्वर को भी रिश्वत का लालच, वो भी कार्य पूरा होने के बाद । हम यह नही सोचते कि जिसका हम ध्यान कर रहे है वो है कौन ? वो जिन्होने क्रोध,मान,माया,लोभ, राग , द्वेष को काट कर परमात्मा के परम पद को प्राप्त किया है । उनसे क्या मॉगनी करोगे ? फिर भी हम उनसे यह मॉगनी करते रहते है कि हे प्रभु साता करो , भौतिक सुख सम्पत्ति का भंडार भरो ।

जब हम जीवनी शक्ति व स्वास्थ्य लाभ के लिये स्वच्छ हवा मे बैठते है तो क्या हम हवा से यह मॉग करते है कि हे हवा हमारा स्वास्थ्य अच्छा कर ? क्या ऐसा हम कहते है ? यह उसका स्वभाव है और हमारा उस पर विश्वास ।इसलिये स्वच्छ हवा मे बैठते है ,घूमने जाते है ।

हम स्वास्थ्य लाभ के लिये सूर्य की रोशनी मे बैठते है तो ही सूर्य प्रकाश का लाभ मिलता है ना कि बंद कमरे मे बैठकर सूर्य देवता से ये प्रार्थना करने पर कि हे सूर्य देवता , हमारी जिन्दगी बढ़ाना , हमारा स्वास्थ्य अच्छा करना ।

सूर्य के प्रकाश मे बढ़ने वाले वनस्पति या पौधो को ऐसा जगह रख दे जहॉ प्रकाश का अभाव हो व फिर सूर्य से प्रार्थना करे कि हे सूर्य देवता इन वनस्पतियो व पौधों को प्रकाश दो क्या सूर्य प्रकाश देगा ? खुले स्थान पर रखने से रोशनी अपने आप मिल जायेगी व पौधों मे विकास का संचार होगा ।

जब हमे हवा और सूर्य की रोशनी बिना मॉगे मिलती है तो हमे ईश्वर के पास ऐसी मॉगनी क्यों करनी चाहिये , क्या ईश्वर पर हमे भरोसा नही ?

यदि हम अच्छे कर्मों के साथ ईश्वर का ध्यान व विश्वास करेंगे तो अवश्य ही हमारे जन्म जन्म के बंधन कटेंगे और बंधन कटने से दुख मिटेंगे । क्यों मिटेंगे ? इसलिये मिटेंगे कि दुख का कारण है हमारे कर्म । कारण नही रहा तो कार्य भी नही रहेगा ।

यदि शरीर मे ज्वर , वायु , कफ , पित या सर्दी का विकार हो जाता है लेकिन यदि इन विकारों को हटा दिया जाये तो रोग मिट जायेगा ।

इसी तरह दुख का कारण है अशुभ कर्म । यदि अशुभ कर्म मिटाये नही , काटे नही और भगवान से प्रार्थना करे और मन मे चाहे कि हमे सुख मिल जाये तो कैसे मिलेगा ?

ये दोहा कहा भी जाता है ..

करे बुराई सुख चाहे , कैसे पावे कोय ।

रोपे पेड़ बबूल का , आम कहॉ से होय ।

खेत मे आक या धतूरे का पेड़ रोपे और चाहे कि मेरे खेत मे मीठे मीठे रसदार आम हो तो कैसे संभव होगा ।

सुख शांति पाने के लिये मॉगनी या याचना करने की बजाय हमे कर्मों को सुधारने की जरूरत है । ईश्वर से यह प्रार्थना करने कि हे ईश्वर मै सही राह पर चलते हुये अपने अशुभ कर्मों का समता के साथ पूरा कर सकूँ इसके लिये शक्ति दो ।


आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. उत्तम रचना 🙏👌👍

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