खुशियॉ का क्यूँ करे इंतज़ार ,रखे हमेशा बरकरार # जिंदगी की किताब (पन्ना # 324)

खुशियॉ का क्यूँ करे इंतज़ार ,रखे हमेशा बरकरार…

एक आदमी हर समय यह सोचकर बहुत परेशान रहता था कि उसकी जिन्दगी मे कोई खुशी क्यों नही आती । एक दिन वह उदास होकर भगवान से बातें करने लगा कि हे प्रभु मुझे बताओ मेरी जिन्दगी मे खुशियॉ क्यों नही है ? मैंने ऐसा क्या गुनाह किया है ? मै किसी का बुरा नही सोचता , ना ही किसी के साथ बुरा व्यवहार करता हूँ । ऐसी बातें करते करते उसे नींद आ गई । स्वप्न मे उसे ईश्वर दिखे और बोले कि तुम्हें खुशियॉ चाहिये तो उसके लिये तुम्हें कल सुबह पास के बग़ीचे मे क़तार मे लगे सबसे सुंदर फूल को तोड़कर लाना है लेकिन ध्यान रहे कि एक बार फूलो को देखते हुये उस रास्ते से गुज़रने के बाद दुबारा पलट कर पीछे नही जा सकते हो । वह सुंदर फूल मुझे अर्पण करना जरूरी है । दूसरे दिन सुबह वह आदमी सबसे सुंदर फूलो की तलाश मे उस जगह जाता है जहॉ पर तरह तरह के खूबसूरत फूल लाइन से लगे होते है । वह इन फूलो को देखता और जैसे ही सबसे खूबसूरत फूल को तोड़ने के लिये हाथ बढ़ाता तो तुरंत यह सोचकर रूक जाता कि क्या पता आगे इससे भी ज्यादा खूबसूरत फूल होगा और आगे बढ जाता ।ऐसा करते करते अंत मे ऐसी फूलो वाली जगह पहुँच जाता है जहॉ पर कुछ थोड़े अधखिले हुये या मुरझाये फूल थे । चूँकि फूल लाना जरूरी था व पलटकर वापस पीछे भी नही जा सकता ,इसलिये मरता क्या नही करता , उन्हीं फूलो मे से सबसे ठीक फूल तोड़कर घर पहुँचा व ईश्वर को अर्पण किया । रात को ईश्वर से बात होती है , वह व्यक्ति पूरी बात बताता है । तो प्रभु हँसकर बोलते है कि देखो बेटा तुम बग़ीचे मे सबसे खूबसूरत फूल की तलाश मे गये व फूल दिखाई भी दिये लेकिन हाथ मे क्या आया , बग़ीचे का सबसे मुरझाया फूल ।

ठीक इस बग़ीचे की तरह तुम सब इंसानों की जिन्दगी की खुशियॉ है ।सारी जिन्दगी तुम बड़ी खुशियॉ के इंतज़ार मे छोटी छोटी खुशियॉ को ठुकराकर पूरा जीवन बीता देते हो। इसलिये हर समय तुम सभी इंसानों को यही लगता है कि जिन्दगी मे परेशानियॉ ही परेशानियॉ है ,खुशी नसीब ही नही है ।

बेटा तुम्हारे पास पर्याप्त रूपयों की आमदनी होते हुये भी रूपयों के बाबत कभी संतुष्टि नही मिली , हमेशा पूँजी जमा करने मे लगे रहे । जब भी खर्चे की बात आती तो तुम यह सोचते कि और रूपये की आमदनी हो तो ख़र्चा करूँ ,ऐसा सोचकर खर्चा नही करते । तुम्हे जब तुम्हें कम रूपयों की आमदनी थी तो यही सोचते थे कि थोडी और आमदनी बढेगी तो पिता के लिये अच्छा स्कूटर ख़रीदूँगा ,हालाँकि तुम्हारे पास स्कूटर ख़रीदने के पर्याप्त रूपये थे ,लेकिन और आमदनी बढ़े,उससे पहले ही तुम्हारे पिता का देहांत हो गया । शादी के बाद परिवार बढ़ने पर सोचते थे कि कि नौकरी मे तरक़्क़ी हो जाये तो बीबी बच्चों को घुमाने ले जाऊँगा ।लेकिन तुम्हें तरक़्क़ी ही नही मिली और समय बीतता चला गया । बाद मे बच्चे शादी लायक होने लगे को यह सोचने मे दिन गुज़ार दिये कि बच्चों की शादी के बाद आराम से धार्मिक जात्रा व सत्संग सुनने मे समय दूँगा पर बच्चो के रिश्ते होने मे कोई ना कोई अड़चन आ जाती है ।

ऐसी ढेरों बातें जो आगे का सोचकर तुमने खुशियो के हर क्षण को गँवा दिया है ।

बाद मे जब सारी ज़िम्मेदारियों से निवृत हो गये ,ढेर सारी जमापूँजी हो गई तो शरीर की परेशानियों ने इस क़दर घेरलियाकि चाहकर भी तुम जीवन की अधूरी ख़्वाहिशो को पूरा करने मे समर्थ नही रहे ।

बेटा तुम सब इंसानों की खुशियॉ एक ऐसे बग़ीचे की तरह है जिसमे हर तरह की खुशियॉ के फूल कॉटो के साथ खिलते है । खुशी चाहे वह बड़ी हो या छोटी , बटोरना कैसे है ये तुम्हारे हाथ मे है ।

इंसानी फ़ितरत है कि वह जिन्दगी मे छोटी छोटी खुशियॉ को नज़र अंदाज करते हुये बड़ी खुशी की तलाश मे भटकता रहता है ।जब जिन्दगी ख़त्म आने को होती है तो यह बात समझने आती है कि बेकार मे बड़ी खुशियॉ की तलाश मे छोटी खुशियॉ को भी ढंग से एंजॉय नही किया ।

क्या करना है ? ….

1. हमे अपनी मंजिल पाने के साथ उस सफ़र को भी एंजॉय करना है ।

2. परेशानियों के साथ छोटी बड़ी हर खुशी को भी जीना है ।

3. उलझनों को सुलझाते रहना है ,खुशियॉ को फैलाते रहना है ।

4. जिन्दगी एक सफ़र है ,मुस्कुराते हुये हर कदम को बढ़ाना है ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Advertisements

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    अतिसुन्दर।।छोटी छोटी खुशियों में ही बड़ी खुशियां होती है।

    Liked by 1 person

    1. बहुत बहुत शुक्रिया

      Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s