करो अन्न देवता का आदर !! पेट की भूख क्या होती हैं ? # जिंदगी की किताब (पन्ना # 317)

करो अन्न देवता का आदर …..पेट की भूख क्या होती हैं ?

भूख क्या होती है ? वह किसी भी भूखे व्यक्ति के पास जाकर पूछो ।भूखा पेट इंसान को क्या क्या करा सकता है ऐसे कई अनुभव मैने अपनी जिंदगी मे देखे हैं । भूख से कई दृष्टांत याद आते है ।

पहला दृष्टांत मुझे स्कूल के दिनो मे देखने को मिला …….

स्कूल के दिनो मे मेरी एक सहेली जो कि बहुत अमीर घर से थी । उसको अपने टिफिन का खाना बिल्कुल भी पसंद नही था क्योकि उसकी मम्मी रोज खाने में देशी पोष्टिक आहार डालती थी जो उसको बिल्कुल भी पसंद नहीं था। उसको वेस्टर्न खाना पसंद था इसलिये वह अधिकतर टिफ़िन का खाना स्कूल की दीवार के उस पार फैक देती थी ।और मुझे अपने साथ जबरदस्ती खाने के लिये केंटीन ले जाती थी ।मैं हमेशा उसे खाना ना फैंके ,इसके लिये समझाने की कोशिश करती लेकिन उसे समझ मे नही आता । मैं अपना ही टिफ़िन का खाना खाती,और वह कैंटीन का ।

एक दिन हम रोज की तरह स्कूल मे लंच के समय खाने को फेंकने के लिये स्कूल की दीवार के पास गये ,लेकिन वहॉ टीचर को देखकर रूक गये और किसी बहाने से खाना फेंकने के लिये स्कूल के बाहर आये जैसे ही वह खाना फेंकने वाली थी कि अचानक वहॉ एक फटेहाल गरीब लड़की को देखकर संदेह हुआ ।वह लड़की हमको देखकर झेप गई और कुछ छुपाने की कोशिश करने लगी । रोज़ की तरह खाना फैंक कर हम वापस गेट की तरफ बढ़ने लगे ,अचानक हम दोनो के दिमाग़ मे उत्सुकता हुई कि देखे कि वह लड़की क्यों बैठी हैं । दीवार के एक तरफ हम दोनो छुपकर लड़की पर नजर रखने लगे। उस लड़की ने इधर उधर देखते हुये एक हाथ मे छुपाये हुये गंदे कपड़े को निकाला और मेरे फैंके खाने को मिट्टी से झाड़ कर फटाफट कुछ हिस्सा खाया और कुछ खाना गंदे कपड़े मे लपेटकर चल दी ,शायद परिवार के और लोगो को खिलाने के लिये। ये दृश्य देखकर हम हैरान और परेशान हो गये और मन मे खाने को फेंकने की ग्लानि भी होने लगी । सोचने लगी कि एक और हम जो खाने को व्यर्थ करते है और दूसरी तरफ बेचारे ये गरीब बच्चे जिनको खाना भी मिल जाये बड़ी बात होती हैं ।

हमारे घरो मे जो खाना व्यर्थ जाता है वह हम बासी या अन हाइजेनिक कहकर कचरेदान मे फेक देते हैं लेकिन भूख से बेहाल गरीबो के लिए नही सोचते ।

दूसरा दृष्टांत हॉस्पिटल मे देखने को मिला …….

एक दिन मैं अस्पताल गई वहॉ एक औरत जो बीमार जैसी लग रही थी एक दम सूखा शरीर ,साथ मे पतले से बीमार बच्चे का हाथ पकडे वो अस्पताल मे डाक्टर के कमरे के आगे लाईन मे खडी अपना नंबर आने का इन्तज़ार कर रही थी ।मैं सामने खडी थी ,बडे देर से उसकी बेचैनी देख रही थी। मुझे लगा उसे जरूर कोई बडी तकलीफ है क्योंकि वो अपने एक हाथ की मुट्ठी को कसकर दबा रही थी और वह बच्चा जब भी उसकी उस मुट्ठी को छूता तो वो उस पर गुस्सा करके,और जोर से मुट्ठी बन्द कर लेती ।मुझ से रहा न गया और पूछा क्या बात है?आप बहुत परेशान लग रही हैं?उसने बोला बहन कोई बात नही,बच्चा बीमार है, डाक्टर को दिखाना है। मैने बोला फिर आप बच्चे पर गुस्सा क्यों कर रही हैं? वह सिसक सिसक कर रोने लगी और बोली ,क्या बताऊँ बहन ,मेरा बच्चा कई दिन से बीमार है और भरपेट रोटी न दे सकने से भूख से बेहाल है।देखो कितना कमजोर हो गया हैं ।कुछ भी खाने के लिये बार बार तंग कर रहा है।इस बन्द मुट्ठी मे जो पैसे हैं वह मैने पॉच दिन की कमाई मे से थोड़ा थोड़ा खाने की चीजो से कटौती करके बचाया हैं । इन पैसों से मैं अपने बीमार बच्चे का इलाज करवाऊँगी,भला हम गरीबो का क्या ,दो दिन न भी खाने को मिले तो भी जी लेगे । मुझे डर है कि मेरा नम्बर आने से पहले ही वह भूख से इतना न मचल जाये कि इलाज की जगह खाने मे पैसा चला जाये ।उसकी बात सुन कर रोना आ गया ।

ये देखकर मन मे विचार आया कि अगर हम साल में २ % भी अपनी कमाई का हिस्सा गरीबो की भूख का इंतजाम करने में लगा दें तो दुनिया में कोई भूखा नही मरेगा । दोस्तों में तो इतना ही कहना चाहती हूं की सबसे बड़ा धर्म किसी भूखे को खाना खिलाना है ,भूखों को रोटी दो, गरीबो के मददगार बनो ।

तीसरा दृष्टांत किसी की शादी मे देखने को मिला …..

ऐसा ही एक नजारा किसी की शादी पर देखने को मिला ।वहॉ बुफे सिस्टम मे खाने की ढेर सारी वैरायटी का इंतज़ाम था ,वहॉ तक तो बात ठीक है लेकिन खाते हुये लौंगों को नोटिस किया कि वह पूरी प्लेटें भर भर कर ले जा रहे थे ।उसमें से थोड़ा कुछ खाते ,बाकी का खाना प्लेट मे झूठा छोड़ देते फिर दूसरी चीजो से प्लेट भर कर ले आते ।सब लोगो का झूठा खाना बाहर के कचरेदान मे डाला जाता । जाते समय अचानक मेरी नजर उस कचरेदान पर पड़ी ।अरे !! ये क्या ?? वहॉ का नजारा बड़ा ही मन को दुखी करने वाला मार्मिक था ।वहॉ बहुत ही फटेहाल हालत मे कुछ गरीब बच्चे कचरेदान मे से झूठन को निकाल निकाल कर इस तरह खा रहे थे जैसे कि कई दिनो तक खाना ही नही खाया हो । मन बहुत भर आया और सोचने लगी कि एक तरफ खाने को स्वादानुसार झूठा डाला जा रहा है दूसरी तरफ उसी झूठन से भूख से बेहाल बच्चे अपनी भूख मिटा रहे है ।यह देखकर पुराने जमाने की याद आ गई जहॉ सभी को बिठाकर जरूरत जितना ही परोस कर खिलाया जाता था जिसे खाना व्यर्थ नही होता था जो ,अब ये सब देखकर सही भी लगता है

चौथा दृष्टांत नाले मे देखने को मिलता है …..

मै और मेरा दोस्त अपने घर के पास ही एक नाले के पास खड़े होकर बात कर रहे थे । देखा कि मोहल्ले का एक छोटा सा बच्चा अपने घर से खाने से भरा डब्बा थामे नाले मे फेकने जा रहा था। मैंने पूछा की क्यों फेंक रहा हे इसको ,उसने कहा भैया ये खाना पसंद का नही हैं , और उस बच्चे ने उसे सामने बहते नाले में हल्के से रख दिया और वापस चला गया। उसके हल्के से रखने से खाने का डब्बा पानी मे तैरने लगा।हल्का छेद होने की वजह से उस डब्बे में धीरे-धीरे नाले का पानी घुसने लगा। सामने ही कचरा चुनने वाले बच्चे आ रहे थे।जब उनकी निगाह नाले में तैरते उस खाने के डब्बो पर पड़ी तो वे अपना कचरे वाला थैला वही फेंक कर उस डब्बे को नाले से निकाल कर खाना खाने लगे। ये नज़ारा देखकर तो मै सिहर उठी ।उसी दिन एहसास हुआ की भूख क्या होती है। और मन ही मन फैसला किया चाहे कुछ भी हो खाना वेस्ट न होने पाए। 

आख़िरी दृष्टान्त पढ़कर आपको ऐसा लगेगा कि व्यक्ति भूख मे किस हद तक सोच सकता हैं …..एक बार मैं अपने घर पर काम करने वाला सरवेंट के परिवार से मिलने गॉव गई । वहॉ बातों ही बातों मे एक गरीब परिवार के बारे मे बताया कि वहॉ एक बहुत ही गरीब परिवार हैं ,पिता नही थे ।मॉ सुबह से शाम तक लोगो के ज़रूरत के मुताबिक छोटा मोटा काम मे हाथ बँटाकर थोड़ी सी कमाई कर लेती जिससे बड़ी मुश्किल से बच्चों सहित उसका पेट भरता । उस गॉव मे रिवाज था कि यदि किसी भी परिवार के सदस्य की मृत्यु हो जाये तो वह परिवार दाह संस्कार करके अगले दिन पूरे गॉव को भोजन करायेगा । एक दिन बहुत ही तेज बारिश होने लगी रूकने का नाम ही नही ले रही थी ।अब बेचारी मॉ क्या करे । काम ही नही मिल रहा था ,बारिश की वजह से ।दो दिन तक खाना भी नसीब नही हुआँ ,उस गरीब परिवार को ।बच्चे भूख से बिलखने लगे । छोटी लड़की ईश्वर को हाथ जोड़कर कुछ मॉगने लगी । मॉ के पूछने पर जो उसने बताया वह बहुत ही ह्रदयस्पर्शी था ,बोली कि मॉ मैं ईश्वर से यह दुआ कर रही थी कि जल्द ही इस गॉव के किसी व्यक्ति की मृत्यु हो और हमें भरपेट भोजन मिले ।

दोस्तों अपने आस-पास ज़रूर देख लें की कही कोई भूखा तो नहीं है।यदि आप भूख से तड़पते इंसान को देखोगे तो कभी भी भोजन को व्यर्थ नही होने दोंगे,साथ ही साथ हमेशा यही कोशिश रहेगी कि कोई भी गरीब भूखा नही रहे ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

लिखने मे गलती हो तो क्षमाप्राथी🙏🙏

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