इंसान कुल से नही चरित्र से महान होता है # जिंदगी की किताब (पन्ना # 313)

इंसान कुल से नही चरित्र से महान होता है ।

एक बार रोम के महान दार्शनिक सिसेरी को एक उच्च कुल का घमंडी व्यक्ति मिला व बोला कि तुम तो नीच कुल के हो । हम दोनो की क्या बराबरी ?

दार्शनिक ने बड़ी विनम्रतापूर्वक जवाब दिया -“ मेरे कुल की कुलीनता का आरम्भ मुझसे होता है । तुम्हारे कुल की कुलीनता का अंत तुम्हारे से होता है ।

कुल के उच्च होने का क्या मूल्य है ? “मूल्य है मनुष्य के अपने चरित्र बल का “ । कुल से भी चरित्र श्रेष्ठता महान है । अत: विवेकशील इंसान के लिये कुल का गर्व भी उसके पतन का कारण है ।


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    बिल्कुल सत्य कहा।इंसान कुल से नही चरित्र से महान होता है ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया सराहने के लिये

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