मनुष्य की कीमत # जिंदगी की किताब (पन्ना # 311)

कभी कभी इंसान अपने आप से इस क़दर हार जाता है कि वह अपने आप को मूल्यहीन समझने लगता है पर ऐसा सही नहीं है । हर इंसान में कुछ ना कुछ खूबी या विशेषता ज़रूर होती है ,जरूरत है तो उस ख़ूबी को पहचानने की । ठीक एक लोहे की छड़ की तरह –…

सच बात # Quote

You yourself are the judge, you yourself are the lawyer, you yourself are the defendant. Now tell me, what kind of judgment will be passed? आप खुद ही ‘जज’, आप खुद ही वकील, आप खुद ही आरोपी। बोलो, अब कैसा ‘जजमेन्ट’ आएगा? તમે પોતે જ ‘જજ’, તમે પોતે જ વકીલ, તમે પોતે જ આરોપી. બોલો,…