प्रेरणा # जिंदगी की किताब (पन्ना # 390)

दूसरों की निंदा मे लगकर

समय क्यों गँवाते हो ?

अपनो के अवगुणो को

हर पल क्यों दोहराते हो ?

सेवा और त्याग की भाषा

तुम फिर क्यों भूल जाते हो ?

असीम सुखों की चाहत मे

क्यों स्वार्थी बन जाते हो ?

मीठे बोल से ही यहॉ

अपनत्व क्यों ना बढ़ाते हो ?

अपनो के संसार मे ही

कहॉ संसार मे खो जाते हो ?

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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