मुस्कराहट # जिंदगी की किताब (पन्ना # 384)

जिन्दगी मे हर क्षण मुस्कराये ,

हँसे और औरों को भी हँसाये !!

चेहरा देना तो कुदरत का काम है ,

पर सुंदर भाव देना हमारे हाथ है !!

मुस्कराहट लाने से ,

कैसा भी चेहरा बन जायेगा सुंदर और

आभामंडल बन जायेगा अतिसुन्दर !!

सागर मंथन मे भी पहले निकला विष ,

बाद मे निकला अमृत ,

हम भी हंसेंगे और मुस्करायेंगे तो

हो जायेगा विचारों का मंथन ,

पहले निकलेंगा बुरी सोच का विष

बाद मे निकलेगा अच्छे विचारों का अमृत !!

शांत,सदाबहार मुस्कान प्रभु की ,

आराधना और पूजा बन जाती है ,

मुस्कानों मे कृष्ण की माधुर्यता है ,

तो राम की मर्यादा छिपी है ,

महावीर का मौन है तो ,

मीरा के घूँघरू भी है !!

दिलो दिमाग से जब ,

मुस्कान के फूल खिलते है ,

उसकी खुशबू ,

औरों के दिल पर राज करती है !!

बड़े सौभाग्य से मुस्कराहट कुदरतीरूप से ,

हम इंसानों को उपहार मे मिली है ,

वरना जानवर बेचारे कहॉ मुस्करा पाते है !!

अपने आप से करे सवाल कि ,

हमें जिन्दगी मे खुशी चाहिये या गम ,

जो अंदर से आवाज आये ,

उसको क्षणभर की देरी किये बिना ,

पल भर मे बटोर ले ,

और मुस्कुराना शुरू कर दे !!


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bahut khub likha hai…..sundar bhav dena mere haath men hai.

    Liked by 1 person

    1. बहुत बहुत आभार

      Liked by 1 person

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