रात को भोजन करना लाभदायक या नुक़सानदायक # जिंदगी की किताब (पन्ना # 365)

रात को भोजन करना स्वास्थ्य ,धार्मिक व वैज्ञानिक तीनों दृष्टि से लाभदायक से ज्यादा नुक़सानदायक है ।

हालाँकि आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में सूर्यास्त तक भोजन कर लेना मुश्किल है फिर भी यदि जब भी संभव हो भोजन जल्दी करना श्रेयस्कर है ।

स्वास्थ्य दृष्टि के अनुसार देखा जाये तो भोजन पचाने के लिये भोजन करने व सोने में कम से कम तीन घंटे का अंतर होना चाहिये ,जिससे पेट संबंधी विकार की गति धीरे हो जाती है अन्यथा पचाने के लिये पर्याप्त समय न मिलने से पेट संबंधी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है व स्वास्थ्य भी ख़राब हो सकता है

धार्मिक व वैज्ञानिक दृष्टि से भी देखा जाये तो रात्रि भोजन स्वास्थ्य के लिये सही नहीं है । दिन में जिन सूक्ष्म जीवो की उत्पत्ति होती है वे जीव सूर्य की रोशनी से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों के कारण गमन नहीं कर पाते है जिसकी वजह से भोजन करते समय इसका प्रभाव नहीं पड़ता है जबकि रात में इन जीवों की उत्पत्ति व गमन दोनों में बढ़ोतरी हो जाती है । जिसकी वजह से ये सूक्ष्म जीव हमारे खाने में आ जाते है हालाँकि इन सूक्ष्म जीवो को आँखों से देखना मुश्किल होता है । अधिकांश सूक्ष्म जीवो का रंग भोजन के रंग के अनुरूप होता है । जैसे रोटी के ऊपर रोटी जैसे रंग के जीव की उत्पत्ति हो जाती है । सब्ज़ी है तो सब्ज़ी के रंग के जीव की उत्पत्ति हो जाती है ।

जैनों शास्त्रों के अलावा अन्य ग्रन्थों में भी कहा गया है कि जो रात को भोजन नहीं करता है उसके जीवन का आधा भाग एक प्रकार से तप में गुज़रता है ।

इसके अलावा दिन मेंसूरज की धूप की वजह से हमारे शरीर की पाचन क्रिया ज़्यादा सक्रिय हो जाती है जबकि रात में वही क्रिया मंद हो जाती है । एक और कारण है कि दिन में पेडपौधे ऑक्सीजन छोड़ते है व रात्रि में कार्बन डाइऑक्साइड जिसका हमारे पाचनतंत्र व स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है ।

इसलिये जहाँ तक संभव हो ,रात को सोने से तीन घंटे पहले भोजन कर लेना बेहतर है ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने में ग़लती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 thoughts on “रात को भोजन करना लाभदायक या नुक़सानदायक # जिंदगी की किताब (पन्ना # 365)

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  1. agar shaam ko bhojan kiya jaaye to jyada shrsthkar hai……prachin samay men log andhera hone se pahle khaa liya karte they aur subah tin baje uth jaya karte they magar aaj bijli aur television ke daur men dincharya kaphi bigad gaya hai…..sahi likha apne.

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