ज़िन्दगी में अहमियत ज्ञान व ध्यान की # जिंदगी की किताब (पन्ना # 364)

आध्यात्मिक व अच्छी ज़िन्दगी जीने के लिये ध्यान व ज्ञान दोनों की एक साथ महत्वपूर्ण भूमिका होती है । वह कैसे होती है ? इसको एक उदाहरण के जरिये अच्छा समझ सकते है ।

यदि एक खिड़की पर कॉच लगा दिया जाये व उससे बाहर सड़क को देखे तो कई चलते फिरते लोग , तरह तरह के वाहन आदि दिखाई देते है ।

लेकिन यदि इसकी जगह खिड़की पर आईना लगा दिया जाये व बाहर सड़क पर नजर डाले तो स्वयं दिखाई देते है ।

यहॉ कॉच ज्ञान है जिससे संसार को समझना है ।और दर्पण ध्यान है जिससे खुद को समझना है ।

ज्ञान मार्ग से जब संसार को समझेंगे तब ध्यान में परिपक्वता आयेगी और ध्यान किये बिना ज्ञान में पूर्णता नहीं आयेगी ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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4 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    gyan aur dhyan dono ek dusre ke purak hain……
    dhyaan wahi kar sakta hai jiske paas gyaan hai…..dhyaan kaa.

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    1. सही है ये दोनों एक दूसरे के पूरक है

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  2. kishorkhatri says:

    Kyaa baat …..bahut khub likha hai.

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