नम्रता – जिंदगी की किताब (पन्ना #362)

झुकता वही है जिसमें कुछ जान है, ज़िन्दगी में वृक्ष की तरह बनें , जैसे जैसे लदता है ,नमता चला जाता है। उस काठ की तरह ना बनें , जो टूट तो सकता है, पर झुक नहीं सकता। आपकी आभारी विमला विल्सन जय सच्चिदानंद 🙏🙏 Advertisements

प्रोत्साहन # Quote

Dunia mein aaisa vyakti kon hein Jisey kisi bhi badha ka samna karna na padta ho Sacchai toh yeh hein ki har roz kisi na kisi dikkat ka samna karna hi padta hein Phir jiwan mein badhaoo se ghabrana kaisa आपकी आभारी विमला विल्सन जय सच्चिदानंद 🙏🙏