भीख # जिंदगी की किताब (पन्ना # 361)

भीख……..< strong>< strong>भीख मॉगने वाला ही भिखारी नही है बल्कि एक तरह से हम सब भी एक भिखारी की तरह ही है । किसी को मान की भीख , किसी को लक्ष्मी की भीख , तो किसी को कीर्ति की भीख , विषयों की भीख , शिष्यो की भीख यानि की किसी न किसी प्रकार की भीख रहती है ।

जहॉ किसी भी प्रकार की भीख होती है वहॉ भगवान व भक्त अलग है ।लेकिन जहॉ किसी भी प्रकार की भीख नही है वहॉ भगवान व भक्त अभेद हो जाते है ।

भीख से एक बात याद आती है । एक बार सर्दी के दिनों में एक भिखारी किसी सेठ के पास भीख माँगने जाता है व बोलता है कि सेठजी खाने को कुछ दीजिए ना , सुबह से कुछ भी नहीं खाया है । सेठजी तंग दिल का था , बोला मेरे यहॉ भी कुछ खाने को नहीं है ।तो भिखारी बोला खाने को नहीं है तो ओढ़ने को चद्दर ही दे दीजिये । सेठ बोलता है चल भाग यहॉ से , मेरे खुद के पास नहीं है तो तुझे कहॉ से दूँ । तब तुरंत भिखारी बोलता है आपके पास ना खाने को है , ना ओढ़ने को है तो आप यहॉ पर क्यों बैठे हो ,आइये हम एक साथ मिलकर भीख माँगे । यह सुनकर सेठ शर्मिंदा हो गया ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Advertisements

4 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    Bahut badhiya laghu katha…sach me sabhi bhikhaari hain.

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s