हिम्मत ना हार # जिंदगी की किताब (पन्ना # 342)

तु तकदीर को हरदम

क्यो रोता है इंसान

हिम्मत से चलता चल

तदबीर को बना ले साथी


हिम्मत का भगवान हिमायती

ऐसी वो अद्भुत शक्ति है

जिसका वार ना जाता ख़ाली

चलाकर तो देख

हिम्मत के इस तीर को


अगर पुरूषार्थ तजकर के

ऑसू यूँ ही बहायेगा

सुनहरा समय बीत गया तो

पीछे कौन पछतायेगा

नयनों के नीर बहाकर

समय को बरबाद ना कर


ग़ैरों पर क्यो भरोसा करे

जबकि तु स्वयं ही निर्माता है

खुद ही शक्ति पुंज है

खुद ही भाग्य विधाता है

वीरों को शोभा नही देती कायरता ।


निराशा को हटा कर

बढ़ा क़दम जीवन मैदान मे

सीना तान , बढता चल तूफ़ान मे

सफल बनाले तु इंसान

अपने इस जीवन को ।


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    apki kavita adhiktar himmat aur josh dilaati huyee hoti hai…..usi men ek aur behtrin kadi judti huyee…..bahut badhiya.

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    1. सराहने व बढ़ावा देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद

      Liked by 1 person

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