पुरुषार्थ # जिंदगी की किताब (पन्ना # 337)

श्रमजल से अगर सींचें तो माटी से सोना उगलता है पुरुषार्थ के भव्य क्षितिज से सिद्धि का सूरज उगता है । Sramjal se agar sinchey toh gt; Mati se sona ugalta hein Purushar>आपकी आभारी विमला मेहता ; Advertisements