दहेज की दानवता # जिंदगी की किताब (पन्ना # 335)

लक्ष्मी पूजन करने वालों पहले साक्षात लक्ष्मी का आदर करो

दहेज दानवता की जकड़ से उसे पूरी तरह से आज़ाद करो तुम लक्ष्मी

लक्ष्मी कहने वाले जरा इस बात विचार करो तुम

बेटी सबकी बेटी है द्वेष नही उसे प्यार करो तुम

क्यों दहेज की दानवता का सरे आम जाल बिछाते हो

अपनी ही बेटी की हत्या का कलंक सिर पर लगाते हो

जिस बेटी को बहू बनाकर अपने घर ले आते हो

उस बेटी को लक्ष्मी सा आदर क्यूँ नही दे पाते हो

बहू नही बेटी समझकर मत दो उसको कोई भी घाव

जिस घर मे किसी बेटी की आग लगाई जायेगी

उस घर मे वही कन्या सचमुच बेटी बनकर क़र्ज़ चुकाने आयेगी

मानव होकर मानवता से जीवन मे नव ज्योति भरो

दूल्हा दूल्हे राजा बनकर बाराती के संग आता है

ऐसा लगता स्वजन ही डाकू बनकर डाका डालने आया है

हाथ जोड़कर समधी डर कर अपना फर्ज निभाते है

लौट गया वह खुशी खुशी तो मन आनंदित हो जाता है

यमराज नही जवाई बनने का इतना तो उपकार करो तुम

अपने बल से कर लो कमाई तो उत्तमता का दर्जा पाओगे

पिता के बल से पहचान बने तो मध्यमता का दर्जा पाओगे

मॉग मॉगकर अपने ससुर की ऑखो मे बेबसी के ऑसू लाओ

ना तुम अधमाधम की कोटि मे सबसे पहले जाओगे तुम

इतने पर भी ना समझे तो मानव नही तुम दानव हो

दहेज प्रथा आज से नही पहले से चली आ रही है । लडके के परिवार वाले दहेज मे अपने बेटे की पढाई मे जो पैसे का ख़र्चा करते है उसे वसूलने का सोचते है तो दूसरी और स्वयं लडका भी ये सोचता है कि मेरे मॉ बाप ने मेरा भविष्य बनाने के लिये कितने पैसे खर्च किये है मुझे भी ऋण उतारना है ।ऐसा सोचकर वह भी दहेज लेने मे अपनी अनुमति दे देता है है । आजकल ँकुछ नवयुवतियाँ शादी नही करने का फैसला भी ले लेती है तथा पढलिख कर या जो कुछ भी करना जानती है उसको ज़रिया बनाकर आय का साधन बनाती है । यदि कोई ऐसा नही कर पाती है तो शादी के बाद रोज दहेज की प्रताड़ना सहन करते करते या खुदकशी कर लेती है या ससुराल वालों द्वारा मार दी जाती है ।

अमीर लोग तो करोड़ों रूपये अपनी बेटी की शादी पर खर्च करके अपने आप गौरव मे गौरव महसूस करते है लेकिन वे ये नही सोचते की बेचारे साधारण इंसान को कितनी तकलीफ का सामना करना पड़ता है । आजकल ये कहना बिल्कुल भी अनुचित नही होगा कि “दूल्हा ख़रीदा जाता है “ तो दुल्हन बेची जाती है । जितना बड़ा दूल्हे का पद उतना बड़ा उसका ख़रीदार । हालाँकि दहेज परम्परा के विरोध मे सरकार ने कई कठोर क़ानून बनाये है पर उससे क्या ? यदि मानव मे मानवता आये तो सरकार की बात का असर पड़े व समाज का सुधार हो ।सरकार दंड दे सकती है लेकिन लोगो की मानसिकता तो नही बदल सकती । यदि इस परम्परा को जड़ से उखाड़ना है तो सबसे पहले युवक , युवतियों को ही दहेज परम्परा के विरूद्ध मजबूती के साथ क़दम उठाना होगा । लडका स्वयं ही दहेज लेने से इंकार कर दे तो दूसरी और लडकी जहॉ दहेज की मॉग हो वहॉ शादी करने से इंकार कर दे ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

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20 Comments Add yours

    1. अभी साइट मे कुछ प्रॉब्लम होने से इस लेख के शब्दो मे कुछ गड़बड़ी हो रही है । मैने उसे वापस पोस्ट किया है उसे पढिये …..बहुत बहुत धन्यवाद

      Liked by 1 person

  1. Deepti says:

    Mam mujhe apki ye post bahot psnd aayi aur infact ise padh kr main emotional ho gyi..apko agr koi aapati na ho to main apki post apne blog pr share kr skti Hoon? Pls ans

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    1. आप शेयर कर सकती है

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      1. Deepti says:

        Thanks heaps mam 🙂

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  2. Madhusudan says:

    bahut hi gambhir manavjanit samasya par bahut hi behtarin kavita likha apne…….

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    1. शादी के नाम पर लाखो करोड़ों रूपये लुटा देने की बात दिन पर दिन बढ़ती जा रही है । हमारे हमारे समाज मे तो काफी ज्यादा रिवाज बढ़ गया उसे ही देखकर अपनी सोच उस लेख के ज़रिये व्यक्त की है

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      1. Madhusudan says:

        ye sonch sati pratha se bhi jyaada bhayawah ho gaya hai…..lo khet khalihaan,dukaan sab bech de rahe hain……aakhir kyaa paa rahe hain……phir bhi lenewaalon ki hawas kam nahi ho rahi……sachmuch dulhe ka bazaar ban gaya hai…….beti ke pita ko beti ko dene ki jo iksha hai shauk se de….magar use niyam bana diya gaya hamare dwaara ye bahut hi galat hai.

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        1. सही कहा आपने ….बहुत बहुत शुक्रिया है ।

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    2. लेख को पसंद करने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया

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  3. rani jain says:

    bitter truth…😥😥

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    1. सही बोला …… धन्यवाद

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