बाल दिवस की शुभकामनायें # जिंदगी की किताब (पन्ना # 333)

बच्चे परिवार की आत्मा है तो

समाज की रीढ़ की हड्डी है ।

बच्चो की सहजता,निश्छलता,सरलता

दूसरो के काम आने की सहभागिता होती है।

जज्बा,जिज्ञासा,समर्पण,सदभाव

बच्चो जैसी कही नही होती है ।

बच्चा होना कल्याणकारी है और

मासूमियत होना सुकुन की बात है ।

बच्चे तो देश के भाग्य विधाता है।

मंदिरों मे भी भगवान को बालरूप मे पूजा जाता है ।

श्रीकृष्ण का माखन चोर ,नंद किशोर ,

बाल गोपाल रूप लीलाधर की लीला है ।

भगवान राम का भी बालरूप मन को लुभाता है ।

भगवान महावीर का बालरूप

पालना झूलाने के संग मनोहारी है ।

बालरूप है ही ऐसा जो आहलादकारी है

आनंदता के साथ सबके मन को रिझाता है ।

बालक कुछ भी कर गुज़रने की क्षमता रखते है ।

बालक एक बीज है

जो छोटा होने पर भी

जमीन पर उतरने के बाद विशाल वृक्ष बन जाता है ।

शिवाजी ने सोलह साल मे किला फ़तह कर लिया ।

तो अकबर ने तेरह साल मे सम्राट पद को पा लिया ।

आज के बच्चे कम्प्यूटराइज्ड है ।

उनको घर का गमला ना बनाकर पहाड़ी पौधा बनाये ।

जो खुद के बलबूते पर खड़ा रह सके ।

बच्चो के साथ बच्चा होना पड़ता है ।

मित्र बनकर उनके कोपलो को ,

कलियों को पुष्पित करना पड़ता है ।

बच्चे जहाज़ की तरह होते है ।

जिनको सिर्फ किनारे तक ध्यान रखना पड़ता है ।

समुद्र मे उतरने के बाद

बच्चे को ही अपना ध्यान रखना पड़ता है ।

मॉ बाप को बच्चे को इतना विश्वास दिलाना पड़ता है

चाहे वह दूर रहे या उनके पास

लेकिन जब भी वह लड़खड़ाये

हो उसको सहारे की जरूरत

वो हाज़िर होंगे जरूर ।

स्वयं सिर्फ उपदेशक ना होकर

अपने बच्चो के लियेआदर्श बने ।

बच्चे को आजादी दे

पर इतनी भी नही कि

उन पर बिल्कुल अंकुश ही ना रहे ।

बच्चे को लायक बनाये

इतना भी नही कि आपके प्रति नालायक हो जाये ।

मॉ बाप से ऐसी प्रेरणा मिले

जिसे बच्चे जिंदगी मे भटके नही ,

बिना अटके यशस्वी और सफल बने ।

और उनके आर्शीवाद उनके प्रगति की कुंजी बन जाये ।

बालदिवस की सबको हार्दिक शुभकामनायें

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आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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