ईमानदारी # अनुभव # जिंदगी की किताब (पन्ना # 331)

हम पति पत्नी बाजार मे शॉपिंग के लिये गये । वहॉ पर एक कृत्रिम पौधों की दुकान थी । बहुत ही सुंदर पौधे रखे थे व साथ मे तरह तरह फूलो की फुलवारी भी शोभा बढा रही थी । हमारा भी मन पौधों को देखकर ललचा गया और कुछ पौधे खरीद लिये । पैसे चुकता करने के बाद दोनो वापस  घर को लौट आये ।
 दूसरे दिन पति के पास दुकान वाले का फोन आया कि आपने गलती से हमे ज्यादा रूपये दे दिये आकर ले जाना । दरअसल हुआ यूँ कि रात को दुकान बंद करने का समय था और हमारे पास छुट्टे रूपये नही थे तो बंधे रूपये का नोट पकड़ा दिया। जल्दी जल्दी के चक्कर मे पैसे के हिसाब मे गड़बड़ी हो गई और दुकानदार के पास कुछ रूपये रह गये । हमे ध्यान ही नही रहा कि दुकानदार के पास ज्यादा पैसे चले गये । 

पौधे बडे व भारी होने की वजह से दुकान वाले ने बोला कि आप जब पार्किंग मे पहुँचो तो कॉल कर देना । हम कार तक पौधे पहुचॉ देंगे । फोन करते ही वह पौधे कार मे छोड गया।

दूसरे दिन दुकान वाले के हिसाब मे ज्यादा रूपये आ रहे थे तो उसने सेल्स मेन जो उस दिन शहर से बाहर गया था ,जिसने हमे पौधे बेचे थे ,उसको कॉल करके हमारे नम्बर लिये और फोन किया कि आप वहॉ पार्किंग मे पहुँचकर कॉल करो मै आपके रूपये आकर दे जाऊँगा । ऐसे भी आजकल ईमानदार आदमी होते है ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    aise hi logon ke karan abhi bhi bharosh kayam hai…..bahut badhiya.

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