दर्शन की कीमत ?# जिंदगी की किताब (पन्ना # 328)

महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध मंदिर में भगवान के दर्शन के लिये बहुत लम्बी लम्बी क़तारे थी । वहॉ पूजा का सामान बेचने वाले, पूजा का सामान ख़रीदने वाले से पूछ रहे थे कि” साहब “या “मैडम”आप यदि मेरे यहॉ से पूजा सामग्री ख़रीदेंगे तो आपको मै अलग छोटी सी लाइन मे जल्दी से दर्शन करवा दूँगा , 45 मिनट मे हो जायेंगे । 
वहॉ कुछ पर्यटक भी दर्शन के लिये क़तार मे खड़े थे । उस मे से एक पर्यटक खड़े रहने से कुछ परेशान हो रहा था । उसकी परेशानी भाँपकर एक व्यक्ति आया और अंग्रेजी मे बोला कि देखिये बहुत लम्बी कतार है ,आपको दर्शन के लिये काफी समय इंतजार करना पड़ेगा । यदि आपको तुरंत दर्शन करने हो तो मै करवा सकता हूँ लेकिन इसके लिये वी. आई पी . का पास जिसकी कीमत 1001/ रूपये है । यदि थोड़ी देर इंतजार के बाद दर्शन करे तो 501/ रू. मे  करवा दूंगा !ऐसा सुनकर वह पर्यटक बोला कि मै तुम्हे 1001/ की जगह 10,000 रूपये दूँगा पर शर्त इतनी है कि तुम्हे प्रभु को मेरे पास लाना होगा दर्शन के लिये ।!

वह व्यक्ति गुस्से मे बोला कि आप कैसा मज़ाक़ कर रहे है  भगवान भी कभी मंदिर से बाहर मिलने आते हैं  

वह पर्यटक बोला ,छोड़ो ,यदि आप मंदिर के बाहर नही ला सकते हो तो कोई बात नही लेकिन निवास स्थान पर तो ला सकते हो ? इसके लिये मै तुम्हे एक लाख रूपये दूँगा । अब वह व्यक्ति चिल्लाकर बोला कि आपने भगवान को क्या समझ रखा है  जो इसके लिये कीमत लगा रहे हो । 

पर्यटक तपाक से बोला कि वही तो मै भी जानना चाहता हूं, कि आपने भगवान को क्या समझ रखा है ,एक आमदनी का ज़रिया ? पैसे बनाने के लिये कोई वस्तु समझ रखी है क्या ?जो उसके दर्शन के लिये मोलभाव कर रहे हो ।

 आजकल काफी मंदिरों मे इस तरह का माहौल देखने को मिलता है ,यहॉ तक कि पूजा व आरती के नाम पर भी रूपयों की बोली लगती है ।ऐसा माहौल देखकर मै अपने आप को रोक नही पाई । सोचने को मजबूर हो गई कि इंसान पैसो की खातिर मंदिर जैसे पावन स्थल को भी नही बख़्शता है ।

इसको रोकने के लिये हम सभी को क़दम उठाना होगा ।भगवान भाव का भूखा होता है ,उसके लिये चाहे कितना भी समय लगे ।भगवान के आगे समय व पैसा सब बेकार है सिर्फ भाव ही मायना रखता है ।

मेरा लिखा कुछ गलत लगा हो तो माफी चाहती हूँ ।मेरा आशय किसी का दिल दुखाना नही है ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

Advertisements