आओ सैर करे प्रकृति की पाठशाला की – जिंदगी की किताब (पन्ना # 317)

चलो आज सैर करे प्रकृति की पाठशाला की और

ऐसी पाठशाला जो कॉलेज, स्कूलों मे नही वरन वनों से उत्पन्न हुई है 

जो संस्कारमय बोध का पाठ उपहार स्वरूप प्राप्त करवाती है ।

जो सुंदरता ही नहीं वरन इंसान के व्यक्तित्व को भी निखारती है।

धन्य है वे महापुरूष जो संसार के कौलाहल से हटकर 

प्रकृति का पाठ पढ कर सभ्यता का निर्माण करते है ।

इस पाठशाला से अपूर्व शिक्षा ग्रहण करते है  

एक छोटी सी पांखुडी मे कौनसा तत्व समाया है ?

उसकी ऐसी रचना से हम क्या सीख सकते है 

जानकर आश्चर्य होगा कि

बडे बडे कुशल कारीगर जो विशाल व सुन्दर देवालय का निर्माण करने मे कौशलता का परिचय देते है 

उनकी यह कौशलता भी फूल पॉखुडी की अद्भुत रचना की रमणीयता के सामने फीकी पडती है ।

पृथ्वी के लाखों विशेष जीवो ,प्रजातियाँ ,पशु पक्षी,वनस्पति के संग

प्रकृति की अद्भुत छटा ,पर्यावरण, इको सिस्टम और

पृथ्वी ,वायु, जल ,अग्नि ,आकाश के संग प्रकृति हमे बहुत कुछ सिखलाती है 

धैर्य और क्षमा के साथ आघात या उत्पात से बचने का पाठ पृथ्वी हमे सिखाती है 

 जगह जगह आसक्त ना होना , ना ही किसी के गुण-दोष देखने या अपनाने का पाठ वायु हमे सिखाती है 

अपना स्वभाव स्वच्छ, शुद्ध, मधुर और पवित्र रखने का पाठ जल हमे सिखाती है 

तेजस्वी और ज्योर्तिमय जिन्दगी जीना जिसके तेज को कोई दबा ना सकने का पाठ अग्नि हमे सिखाती है 

आग ,पानी या कोई भी प्राकृतिक विपदा पैदा होने पर भी आकाश की तरह अछूता और अखंड रहने का पाठ प्रकृति हमे सिखाती है ।

 सूर्य आसक्त हुये बिना अपनी किरणों से धरा का जल खींचकर उसे फिर बरसाता है । सूर्य आसक्त ना होने का पाठ सिखाता है 

 स्थिती चाहे बाढ़ की हो या सूखे की , फिर भी समुद्न ना तो बढ़ता है और ना ही घटता है । 

उसी तरह इंसान को भी भौतिक वस्तु के पाने या खोने पर ना तो खुश ,ना ही दुखी होने का पाठ समुद्र हमे सिखाता है 

भौरा छोटे-बड़े अनेक पुष्पों से रस सार मात्र ग्रहण करता है 

वैसे ही हम इंसानो को भी निरर्थक बातो को छोड सार्थक बाते अपनाने का पाठ यह हमे सिखाता है 

मधुमक्खी का संचित रस अन्य लोग ही ले उड़ते हैं। वैसे ही लोभी व्यक्ति के संचित धन को भी कोई दूसरा ही ले उडता है , 

धन संग्रह की लोभी प्रवृति छोड़ने का पाठ मधुमक्खी हमे सिखाती है  

इसी तरह  पाठशाला की अनेको बाते जो इस खूबसूरत प्रकृति मे रची बसी है 

हमे बहुत कुछ पढ़ा जाती है , सीखा जाती  है 

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bahut hi khubsurati se prakriti ka varnan kiya apne……sach men chhote se chhote aur bade se bade parakriti ke sajiv aur nirjiv sabhi hamen kuchh n kuchh sikh dete hain ye alag baat hai ki ham ahankari unka anusaran nahi karte…….bahut khub.

    Liked by 1 person

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