अभिमान – जिंदगी की किताब (पन्ना # 314)

एक व्यक्ति ईश्वर की बहुत भक्ति करता था । एक दिन वह अपने गुरू से बोला , गुरूजी मै पिछले तीस सालों से तन्मयाकार होकर प्रभु भक्ति कर रहा हूँ फिर भी मुझे ज्ञान नही हुआ ,क्यों ? गुरूजी बोले देखो पुत्र तीस साल क्या तीन सौ साल भी तुम भक्ति करोगे तो भी तुमसे…